कोहली vs सचिन: क्या टूट पाएगा क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा रिकॉर्ड, इन आंकड़ों ने उड़ाए फैंस के होश

कोहली vs सचिन: क्या टूट पाएगा क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा रिकॉर्ड, इन आंकड़ों ने उड़ाए फैंस के होश

भारतीय टीम के लिए अच्छी खबर है। स्टार बल्लेबाज विराट कोहली इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज से वापसी करने जा रहे हैं। आईपीएल 2026 के फाइनल के दौरान लगी हैमस्ट्रिंग चोट की वजह से वह अफगानिस्तान के खिलाफ पिछली वनडे सीरीज का हिस्सा नहीं बन सके थे। अब वह पूरी तरह फिट हैं और टीम के साथ खेलने के लिए तैयार हैं। उनकी वापसी से भारत की बल्लेबाजी को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

शानदार फॉर्म से बढ़ा टीम का आत्मविश्वास

सीरीज शुरू होने से पहले कोहली ने जमकर अभ्यास किया है। हाल के मैचों में उनका प्रदर्शन भी बेहद प्रभावशाली रहा है। पिछली सात पारियों में उन्होंने छह बार 50 से ज्यादा रन बनाए हैं। इनमें तीन शतक भी शामिल हैं। ऐसे में भारतीय टीम को उम्मीद होगी कि इंग्लैंड के खिलाफ भी वह इसी लय को जारी रखेंगे।

15 हजार रन के बेहद करीब विराट

वनडे क्रिकेट में विराट कोहली लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। उन्होंने 311 मैचों में 54 शतकों की मदद से 14,797 रन बनाए हैं। अब 15,000 रन पूरे करने के लिए उन्हें सिर्फ 203 रनों की जरूरत है। अगर उनका मौजूदा प्रदर्शन जारी रहा तो इंग्लैंड सीरीज के दौरान ही वह इस खास उपलब्धि तक पहुंच सकते हैं।

सचिन का रिकॉर्ड अभी भी बड़ी चुनौती

विराट कोहली वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ियों की सूची में दूसरे स्थान पर हैं। उनसे आगे सिर्फ सचिन तेंदुलकर हैं। सचिन ने 463 वनडे मैचों में 49 शतक लगाए और 18,426 रन बनाए थे। इस समय दोनों के बीच 3,629 रनों का अंतर है। कोहली पहले ही वनडे शतकों के मामले में सचिन का रिकॉर्ड पीछे छोड़ चुके हैं लेकिन कुल रनों का रिकॉर्ड अभी भी उनसे काफी दूर है।

क्या सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड टूट सकता है?

सवाल यह भी है कि क्या विराट कोहली सचिन तेंदुलकर के कुल वनडे रनों का रिकॉर्ड तोड़ पाएंगे। मौजूदा कार्यक्रम को देखें तो यह आसान नहीं लगता। 2027 विश्व कप तक भारत के पास सीमित वनडे मुकाबले हैं। अगले साल जनवरी तक टीम के लगभग 17 वनडे मैच तय हैं। ऐसे में 3,629 रन बनाना बड़ी चुनौती होगी। यदि कोहली अपने 58.71 के औसत से रन बनाते रहे तो उन्हें करीब 3,640 रन जोड़ने के लिए 62 और पारियों की जरूरत पड़ेगी। मौजूदा कार्यक्रम को देखते हुए यह लक्ष्य काफी कठिन नजर आता है।

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