Up kiran,Digital Desk : हम और आप जिस दुनिया को देखते हैं—चाँद, तारे, ग्रह, और हम खुद—यह सब ब्रह्मांड का सिर्फ 15 प्रतिशत हिस्सा है। बाकी का 85 प्रतिशत हिस्सा एक ऐसे पदार्थ से बना है जो हमें दिखाई ही नहीं देता। इसे वैज्ञानिक 'डार्क मैटर' कहते हैं। इसे न तो आँखों से देखा जा सकता है और न ही किसी सामान्य मशीन से।
लेकिन, अब लगता है कि हम इस अदृश्य शक्ति को समझने के बहुत करीब पहुँच गए हैं। नासा (NASA) के 'फर्मी गामा-रे टेलीस्कोप' ने हमारी आकाशगंगा (Milky Way) के केंद्र से कुछ ऐसे सिग्नल पकड़े हैं, जो एक बड़ी खोज की तरफ इशारा कर रहे हैं।
आकाशगंगा के दिल में क्या हो रहा है?
दरअसल, नासा के टेलीस्कोप ने मिल्की वे के ठीक बीचों-बीच से आ रही बेहद शक्तिशाली 'गामा किरणों' (Gamma Rays) को रिकॉर्ड किया है। विज्ञान की भाषा में इनकी ऊर्जा '20 गीगा इलेक्ट्रॉन वोल्ट' (20 GeV) मापी गई है।हैरानी की बात यह है कि ये किरणें किसी साधारण तारे या ग्रह से नहीं आ रही हैं। आमतौर पर अंतरिक्ष में ऐसी रोशनी पल्सर (धड़कते तारे), सुपरनोवा (फटते हुए तारे) या ब्लैक होल से आती है। लेकिन शोधकर्ताओं ने पाया कि इस बार जो पैटर्न और चमक दिख रही है, उसका मिलान किसी भी जानी-पहचानी खगोलीय घटना से नहीं हो रहा है।
यही तो डार्क मैटर है!
टोक्यो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने जब इस डेटा का बारीकी से विश्लेषण किया, तो वे हैरान रह गए। उन्होंने देखा कि आकाशगंगा के केंद्र के चारों ओर इन गामा किरणों का एक घेरा (Halo) बना हुआ है।
वैज्ञानिक वर्षों से जिस थ्योरी पर काम कर रहे थे, यह संकेत बिल्कुल उसी से मेल खाता है। थ्योरी के मुताबिक, जब डार्क मैटर के कण आपस में टकराते हैं या नष्ट होते हैं, तो उनसे ठीक इसी तरह की ऊर्जा और गामा किरणें निकलनी चाहिए। यानी, यह वो 'सिग्नल' हो सकता है जिसका इंतजार दुनिया दशकों से कर रही थी।
क्यों खास है यह खोज?
अभी तक हम डार्क मैटर के बारे में सिर्फ गणितीय अंदाजों से जानते थे कि 'हाँ, कुछ तो है जो आकाशगंगाओं को बिखरने से रोके हुए है।' लेकिन उसका कोई सबूत हाथ में नहीं था। फर्मी टेलीस्कोप का यह डेटा पहला ऐसा 'प्रत्यक्ष अवलोकन' (Direct Observation) हो सकता है जो साबित करे कि डार्क मैटर सच में मौजूद है और यह कैसा व्यवहार करता है।
अगर यह पुष्टि हो जाती है कि यह सिग्नल डार्क मैटर का ही है, तो यह आधुनिक विज्ञान की सबसे बड़ी खोजों में से एक होगी। फिलहाल वैज्ञानिक बेहद उत्साहित हैं और इस रहस्यमयी चमक पर अपनी नजरें जमाए हुए हैं।




