Up kiran,Digital Desk : सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को आवारा कुत्तों के मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री और पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी के कथित विवादित बयान पर बेंच ने नाराजगी जताई।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि मेनका गांधी ने बिना सोचे-समझे हर तरह की टिप्पणियां की हैं।
बेंच ने उनके वकील राजू रामचंद्रन से पूछा कि क्या उन्होंने अपने क्लाइंट से पूछा कि उन्होंने किस प्रकार की टिप्पणियां की हैं।
जस्टिस ने यह भी कहा कि कोर्ट की उदारता के कारण अब तक अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं की जा रही है।
जस्टिस मेहता ने सवाल किया कि मेनका गांधी ने आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए बजटीय आवंटन में क्या योगदान दिया।
रामचंद्रन ने जवाब दिया कि बजटीय आवंटन नीतिगत मामला है और उन्होंने अजमल कसाब की तरफ से भी पेश होने का उदाहरण दिया। जस्टिस नाथ ने टिप्पणी की कि अजमल कसाब ने कोर्ट की अवमानना नहीं की, लेकिन मेनका गांधी ने की।
वकील की दलील
एक अन्य वकील ने कहा कि कुत्ते पालने वाले लोग उनकी व्यवहार और बीमारियों को समझते हैं।
कुत्तों को खाना खिलाने से वे भटकना और लड़ाई बंद कर देते हैं, और बीमारी फैलने की आशंका कम होती है।
प्रति कुत्ते प्रति वर्ष खर्च लगभग 18,250 रुपये है।
उन्होंने कहा, "सहानुभूति को दंडित नहीं किया जा सकता। कुत्तों को हटाने की कोशिश की बजाय, यह पैसा लोगों की भलाई में इस्तेमाल किया जा सकता है।"
सुप्रीम कोर्ट की स्थिति
बेंच ने स्पष्ट किया कि पूर्व मंत्री ने कोर्ट के आदेशों की आलोचना की, जिससे नाराजगी उत्पन्न हुई।
हालांकि, अब तक कोर्ट ने अवमानना की कार्यवाही नहीं शुरू की।
मामला अब भी लंबित है, और कोर्ट आवारा कुत्तों के मुद्दे और नगर पालिका की जवाबदेही पर ध्यान दे रही है।
_1538517291_100x75.png)
_1940669557_100x75.png)
_759249071_100x75.png)
_933664113_100x75.png)
_391431329_100x75.png)