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Up kiran,Digital Desk : सोचिए, आपके सामने एक एस्ट्रोनॉट खड़ा हो, जो अंतरिक्ष की यात्रा करके लौटा हो। आप उनसे क्या पूछेंगे? अलीगढ़ के एक स्कूल में जब बच्चों को यह मौका मिला, तो एक बच्चे ने ऐसा सवाल पूछा, जिसने सबका दिल जीत लिया। उसने एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला से पूछा, “जब आप अंतरिक्ष के अंधेरे में चक्कर लगा रहे थे, तो आपने अपने डर पर काबू कैसे पाया?” इस सवाल पर शुभांशु मुस्कुराए और उन्होंने बच्चों को अपनी कहानी बताई, जो किसी भी किताब में नहीं मिलेगी।

'राम-राम' जपकर मिली हिम्मत

शुभांशु ने बताया, “मैं हमेशा कुछ वाक्यों से हिम्मत लेता हूँ, जैसे- 'कभी हार मत मानो' और 'जिंदगी में सब अच्छा होता है'। लेकिन कई बार ऐसे पल आते हैं, जब डर आप पर हावी होने लगता है। उन मुश्किल पलों में हनुमान चालीसा आपकी बहुत मदद करती है। मैं वहां 'राम-राम-राम' जप रहा था, और सच कहूं तो इससे मुझे बहुत शक्ति मिली।” उन्होंने बच्चों को समझाया कि सबसे बड़ी ताकत डर को खत्म करना नहीं, बल्कि उस डर के होते हुए भी शांत दिमाग से सोचना और सही फैसला लेना है।

अगर कल एग्जाम है और कुछ नहीं पढ़ा, तो क्या करें?

बच्चों को यह बात और आसानी से समझाने के लिए उन्होंने एक ऐसा उदाहरण दिया, जिसे हर स्टूडेंट समझ सकता है। शुभांशु ने कहा, "मान लो, कल तुम्हारा एग्जाम है और तुमने अभी तक कुछ भी नहीं पढ़ा है। अब तुम्हारे पास दो रास्ते हैं:

  1. या तो तुम डर जाओ, चिंता करो और यह सोच-सोचकर बाकी बचा हुआ समय भी बर्बाद कर दो कि 'अब क्या होगा?'
  2. या फिर यह सोचो कि 'जो समय बीत गया, वो गया, लेकिन अभी मेरे पास जितना भी समय बचा है, उसमें मैं क्या पढ़ सकता हूँ?'"

उन्होंने बच्चों को सबसे बड़ा मंत्र दिया- “आपका ध्यान हमेशा इस बात पर होना चाहिए कि आप अभी क्या कर सकते हैं। अगर आप यह करने लगेंगे, तो डर आप पर हावी नहीं हो पाएगा।” यह सिर्फ एक एस्ट्रोनॉट की कहानी नहीं, बल्कि हम सबके लिए एक सीख है। ज़िंदगी का एग्ज़ाम हो या स्कूल का, डर लगना स्वाभाविक है, लेकिन उस डर के आगे घुटने टेक देना या बचे हुए समय का सही इस्तेमाल करना, यह पूरी तरह से हमारे हाथ में है।