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Up kiran,Digital Desk : पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) इस समय बारूद के ऐसे ढेर पर बैठा है, जहां एक छोटी सी चिंगारी वैश्विक महायुद्ध का सबब बन सकती है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु समझौते के लिए महज 10 से 15 दिनों का 'डेथ वारंट' (अल्टीमेटम) थमा दिया है, तो दूसरी तरफ ईरान ने रूस के साथ हाथ मिलाकर ओमान की खाड़ी में युद्धस्तर का सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। खाड़ी के पानी में गरजते युद्धपोत और आसमान में मँडराते लड़ाकू विमान इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि अब कूटनीति की मेज से ज्यादा भरोसा हथियारों पर किया जा रहा है।

ट्रंप की 'डेडलाइन' और समंदर में अमेरिका का 'लोहा'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयरफोर्स वन से सीधा संदेश देते हुए कहा कि ईरान के पास डील के लिए अब गिनती के दिन बचे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन 15 दिनों में बातचीत बेनतीजा रही, तो "बहुत बुरी चीजें" हो सकती हैं। ट्रंप के इरादे कितने सख्त हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने दुनिया के सबसे आधुनिक विमानवाहक पोत यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड को मिडिल ईस्ट भेजने का आदेश जारी कर दिया है। वहां पहले से ही यूएसएस अब्राहम लिंकन तैनात है। दो-दो एयरक्राफ्ट करियर की मौजूदगी इस ओर इशारा कर रही है कि अमेरिका 'लिमिटेड स्ट्राइक' (सीमित सैन्य हमले) के विकल्प पर भी काम कर रहा है।

ईरान-रूस का साझा वार: हाईजैक जहाज छुड़ाने का 'ट्रायल'

ट्रंप की सख्ती के बीच ईरान और रूस ने हिंद महासागर के उत्तरी हिस्से और ओमान की खाड़ी में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास कर दुनिया को चौंका दिया है। इस ड्रिल में ईरान का घातक 'अलवंद' डिस्ट्रॉयर, मिसाइल बोट्स और रूस की स्पेशल ऑपरेशन टीमें शामिल हैं। अभ्यास के दौरान विशेष रूप से 'अपहृत जहाज को छुड़ाने' का ऑपरेशन किया गया, जिसे अमेरिकी दबाव के खिलाफ एक रणनीतिक संदेश माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि रूस का साथ मिलना ईरान के मनोबल को बढ़ाने वाला है।

होर्मुज जलडमरूमध्य: तेल की सप्लाई पर संकट की तलवार

यह अभ्यास उसी रणनीतिक जलक्षेत्र के करीब हो रहा है, जहां से दुनिया की 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुजरती है। हाल ही में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ड्रिल कर इस मार्ग को कुछ समय के लिए बाधित भी किया था। अब रूस के साथ मिलकर किया गया यह युद्धाभ्यास ट्रंप प्रशासन को यह बताने की कोशिश है कि अगर ईरान पर हमला हुआ, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था की रग कही जाने वाली तेल सप्लाई लाइन को बंद किया जा सकता है।

90 प्रतिशत हमले की आशंका: परमाणु ठिकानों पर 'नजर'

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषकों की रिपोर्टें डराने वाली हैं। कई दावों में कहा गया है कि यदि 15 दिनों के भीतर कोई कूटनीतिक हल नहीं निकला, तो ईरान के परमाणु और मिसाइल ठिकानों पर हमले की संभावना 90 प्रतिशत तक है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां और पेंटागन लगातार ईरान के भूमिगत ठिकानों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। फिलहाल कूटनीति और सैन्य तैयारी दोनों साथ-साथ चल रही हैं, लेकिन ओमान की खाड़ी में बढ़ता तनाव यह संकेत दे रहा है कि दुनिया एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है।