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Up kiran,Digital Desk : उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अदालत ने पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) समेत मामले के सभी दोषियों को नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई पीड़िता द्वारा दाखिल उस याचिका पर की गई है, जिसमें उसने दोषियों को दी गई सजा को नाकाफी बताते हुए उसे बढ़ाने (Enhancement of Sentence) की गुहार लगाई है।

पीड़िता ने की कड़ी सजा की मांग

उन्नाव दुष्कर्म मामले की पीड़िता ने अपनी अर्जी में तर्क दिया है कि उसके पिता की हिरासत में हुई मौत एक सोची-समझी साजिश थी। पीड़िता का कहना है कि वर्तमान में दोषियों को जो सजा मिली है, वह उनके अपराध की गंभीरता के मुकाबले कम है। पीड़िता चाहती है कि न्याय के हित में कुलदीप सिंह सेंगर और अन्य दोषियों की सजा को और कड़ा किया जाए। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए सभी पक्षों से जवाब तलब किया है।

अदालत ने CBI से भी मांगा जवाब

जस्टिस की पीठ ने न केवल दोषियों को बल्कि जांच एजेंसी सीबीआई को भी नोटिस जारी किया है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि सजा बढ़ाने की पीड़िता की मांग पर एजेंसी का क्या रुख है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख 2 मार्च 2026 तय की है।

क्या था उन्नाव हिरासत में मौत का मामला?

यह मामला साल 2018 का है, जब दुष्कर्म पीड़िता के पिता को पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया था। आरोप था कि कुलदीप सेंगर के इशारे पर जेल के भीतर और पुलिस हिरासत में उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई, जिसके कारण उनकी मौत हो गई थी। निचली अदालत ने मार्च 2020 में कुलदीप सिंह सेंगर और उनके भाई जयदीप सेंगर समेत सात लोगों को गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) और साजिश रचने का दोषी पाते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।

सेंगर के लिए बढ़ सकती हैं चुनौतियां

कुलदीप सिंह सेंगर पहले से ही दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। अब हिरासत में मौत के मामले में सजा बढ़ाने की याचिका पर नोटिस जारी होने से उसकी कानूनी मुसीबतें और बढ़ सकती हैं। कोर्ट अब 2 मार्च को यह तय करेगा कि क्या दोषियों को दी गई 10 साल की सजा को उम्रकैद या उससे अधिक में बदला जा सकता है या नहीं।