लखनऊ के शिवा हत्‍याकांड में इंस्‍पेक्‍टर, डीसीपी के बाद अब ACP पर गिरी गाज

लखनऊ के शिवा हत्‍याकांड में इंस्‍पेक्‍टर, डीसीपी के बाद अब ACP पर गिरी गाज

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक बार फिर कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। लखनऊ के बहुचर्चित शिवा हत्याकांड (Shiva Murder Case) ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री में लगातार नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस विभाग की अंदरूनी लापरवाही, लचर तफ्तीश और साक्ष्यों को छिपाने के आरोपों के चलते अब गाज बड़े अधिकारियों पर गिरनी शुरू हो चुकी है। इस मामले में पहले स्थानीय थाने के जिम्मेदार इंस्पेक्टर और उसके बाद डीसीपी स्तर के अधिकारी पर कार्रवाई होने के बाद, अब राज्य शासन ने गाज गिराते हुए संबंधित एसीपी (ACP) को भी निलंबित कर दिया है। पुलिस महकमे में हुई इन ताबड़तोड़ बड़ी कार्रवाइयों से हड़कंप मच गया है। हालांकि, इन तमाम प्रशासनिक और पुलिसिया फेरबदल के बावजूद सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल यह बना हुआ है कि इस खौफनाक हत्याकांड की मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड मानी जा रही श्रद्धा दुबे (Shraddha Dubey) घटना के पूरे 10 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक पुलिस की पकड़ से कोसों दूर है और लगातार फरार चल रही है।

क्या है पूरा शिवा हत्याकांड और क्यों सुलग रही है लखनऊ की फिजा?

यह पूरा मामला लखनऊ के एक पॉश इलाके से जुड़ा है, जहां कुछ दिन पहले शिवा नामक युवक की संदिग्ध और बेहद दर्दनाक परिस्थितियों में हत्या कर दी गई थी। मृतक के परिजनों ने शुरू से ही यह आरोप लगाया था कि यह कोई साधारण आत्महत्या या दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया मर्डर है। परिजनों का आरोप था कि इस पूरी साजिश के केंद्र में श्रद्धा दुबे नामक युवती और उसके अन्य साथी शामिल हैं। घटना के सामने आने के बाद जब पुलिस ने शुरुआती जांच में हीला-हवाली की और मामले को दबाने की कोशिश की, तो स्थानीय लोगों और मृतक के परिवार का गुस्सा फूट पड़ा। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस हत्या ने तूल पकड़ लिया, जिसके बाद मजबूरन शासन को कड़े कदम उठाने पड़े। पुलिस की शुरुआती सुस्ती के कारण ही आज एक तरफ जहां कानून का इकबाल कमजोर पड़ता दिख रहा है, वहीं दूसरी तरफ न्याय की आस में भटक रहे पीड़ित परिवार का धैर्य जवाब देता जा रहा है।

पुलिस महकमे में हड़कंप: इंस्पेक्टर और डीसीपी के बाद एसीपी पर भी चला निलंबन का हंटर

शिवा हत्याकांड में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे स्थानीय पुलिस की संलिप्तता और लापरवाही की परतें उधड़ने लगीं। शुरुआती जांच में यह पाया गया कि घटना की रात जब परिजनों ने थाने में शिकायत दी थी, तो पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करने के बजाय मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया था। इस गंभीर लापरवाही के चलते सबसे पहले संबंधित सर्किल के इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर करते हुए निलंबित किया गया। इसके बाद मामले की आंच डीसीपी स्तर के अधिकारी तक पहुंची और उन्हें भी उनके पद से हटा दिया गया। अब ताजा कड़ी में शासन ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित एसीपी को भी निलंबित कर दिया है। सरकार और पुलिस मुख्यालय का यह कड़ा संदेश साफ है कि अपराध और अपराधियों को संरक्षण देने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। बावजूद इसके, जनता के मन में यह सवाल उठ रहा है कि जब तक मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आती, तब तक इन कागजी और प्रशासनिक कार्रवाइयों का आम जनता को क्या फायदा मिलेगा।

10 दिन बीतने के बाद भी श्रद्धा दुबे का सुराग क्यों नहीं जुटा पा रही है यूपी पुलिस?

इस पूरे प्रकरण का सबसे पेचीदा और निराशाजनक पहलू यह है कि घटना को पूरे 10 दिन बीत चुके हैं, उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टीमें, एसओजी और सर्विलांस यूनिट्स दिन-रात छापेमारी कर रही हैं, लेकिन मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे का अभी तक कोई पुख्ता सुराग हाथ नहीं लगा है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपी युवती लगातार अपनी लोकेशन बदल रही है और उसने अपने मोबाइल फोन को भी बंद कर रखा है, जिससे उसकी ट्रेकिंग में तकनीकी बाधाएं आ रही हैं। हालांकि, पुलिस ने उसके करीबियों, रिश्तेदारों और संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ दबिशें देना जारी रखा है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि आरोपी कितनी भी कोशिश कर ले, उसे बहुत जल्द कानून के शिकंजे में कस लिया जाएगा। लेकिन 10 दिन का यह लंबा वक्त इस बात की गवाही दे रहा है कि अपराधी पुलिस की आंखों में धूल झोंकने में कामयाब हो रहे हैं, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहे हैं।

जनता में उबाल और न्याय की मांग, कब तक सलाखों के पीछे होंगे असली गुनहगार?

लखनऊ के इस शिवा हत्याकांड ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि जब तक पुलिस प्रशासन मुस्तैदी से काम नहीं करता, तब तक अपराधियों के हौसले बुलंद रहते हैं। मृतक के परिवार और शहर के नागरिकों का साफ कहना है कि जब तक मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे और उसके सभी छिपे हुए मददगारों को गिरफ्तार करके कड़ी से कड़ी सजा नहीं दी जाती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। इस मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है, और विपक्षी दल लगातार कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार को घेर रहे हैं। आने वाले कुछ दिन पुलिस के लिए बेहद अग्निपरीक्षा वाले होने वाले हैं, क्योंकि यदि जल्द ही मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आई, तो यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है। देवभूमि से सटे इस उत्तर प्रदेश के बड़े शहर में अब हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कब पुलिस श्रद्धा दुबे को पकड़कर इस सनसनीखेज मर्डर मिस्ट्री का पर्दाफाश करती है।