लखनऊ अग्निकांड पर महा-एक्शन: 15 मौतों वाली अलीगंज की अवैध इमारत पर चला LDA का बुलडोजर, छावनी में बदला इलाका
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) के अलीगंज (Aliganj) में हुए उस खौफनाक अग्निकांड को लेकर आज प्रशासन ने एक ऐतिहासिक और बड़ा कदम उठाया है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। शनिवार सुबह तड़के ही लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की टीम जेसीबी (JCB) और बुलडोजर मशीनों के साथ अलीगंज सेक्टर-डी स्थित उस तीन मंजिला अवैध इमारत को ध्वस्त करने पहुंच गई, जिसमें भीषण आग के चलते 15 मासूमों की जान चली गई थी। कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए मौके पर कई थानों की पुलिस और भारी पीएसी (PAC) बल तैनात किया गया है।
15 दिन के नोटिस की मियाद खत्म होते ही चला बुलडोजर
प्राधिकरण की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, एलडीए (LDA) की विहित प्राधिकारी कोर्ट ने इस इमारत में पाई गई गंभीर सुरक्षा खामियों और अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था।
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नोटिस की समय-सीमा समाप्त: भवन स्वामी को अवैध हिस्से को खुद हटाने के लिए 15 दिनों का अंतिम अल्टीमेटम दिया गया था। आज इस नोटिस की मियाद खत्म होने के तुरंत बाद एलडीए ने अपनी ओर से बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी।
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भवन स्वामी का विरोध: इस दौरान इमारत के मालिक ने इस कार्रवाई को 'जल्दबाजी' बताते हुए आपत्ति जताई और दावा किया कि उन्हें आज शाम तक का समय मिलना चाहिए था, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा रिपोर्टों और अदालती आदेश का हवाला देते हुए डेमोलिशन (Demolition) की प्रक्रिया जारी रखी।
SIT जांच में खुली थी भ्रष्टाचार और लापरवाही की पोल
22 जून को इस चार मंजिला इमारत में संचालित हो रहे एक गेमिंग, एनिमेशन और कोचिंग सेंटर में अचानक शॉर्ट सर्किट से भयंकर आग लग गई थी। विशेष जांच दल (SIT) और एलडीए की संयुक्त जांच में जो खुलासे हुए, वे हैरान करने वाले थे:
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नक्शे के विपरीत निर्माण: यह इमारत मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए पास कराई गई थी, लेकिन इसका धड़ल्ले से कमर्शियल इस्तेमाल हो रहा था।
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फायर एग्जिट की जगह बनी थी लिफ्ट: सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि जिस स्थान पर आग से बचने के लिए 'फायर एग्जिट' (निकास द्वार) होना चाहिए था, वहां नियमों को ताक पर रखकर लिफ्ट लगा दी गई थी।
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सीढ़ियां बनीं मौत का जाल: सिंगल एंट्री और एग्जिट होने के कारण आग लगते ही सीढ़ियां पूरी तरह धुएं के गुबार से घिर गईं और बच्चों को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला।
2016 में भी जारी हुआ था तोड़ने का आदेश, पर...
इस कार्रवाई के बीच एलडीए (LDA) के पुराने रिकॉर्ड्स ने भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया है कि इस अवैध निर्माण के खिलाफ साल 2016 में भी ध्वस्तीकरण का आदेश जारी हुआ था। मगर कथित तौर पर विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों की सांठगांठ के चलते उस आदेश को दो महीने के भीतर ही वापस (Revoke) ले लिया गया। यदि 2016 में ही यह अवैध इमारत गिरा दी गई होती, तो आज 15 परिवारों के चिराग नहीं बुझते। प्रशासन ने अब उन तत्कालीन दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त विभागीय जांच शुरू कर दी है।