लखनऊ में हाई-वोल्टेज ड्रामा: "मायावती बाहर आओ" के नारों से गूंजा इलाका, 69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों ने घेरा बसपा सुप्रीमो का आवास
उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69000 शिक्षक भर्ती का विवाद एक बार फिर सड़कों पर उग्र रूप ले चुका है। राजधानी लखनऊ के माल एवेन्यू इलाके में आज उस समय हड़कंप मच गया, जब सैकड़ों की संख्या में शिक्षक भर्ती के दलित और पिछड़ा वर्ग (OBC/SC) के अभ्यर्थियों ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के आवास का अचानक घेराव कर दिया। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने आवास के बाहर बैठकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी और "मायावती बाहर आओ, हमें न्याय दिलाओ" के नारे लगाए। स्थिति को बिगड़ता देख भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और प्रदर्शनकारियों को जबरन हिरासत में ले लिया।
क्यों घेरा मायावती का आवास? अभ्यर्थियों का दर्द
लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि वे हर राजनीतिक दल और बड़े नेता के पास न्याय की गुहार लगाने जा रहे हैं।
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विपक्ष से समर्थन की उम्मीद: प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण नियमों की अनदेखी के कारण हजारों दलित और पिछड़े वर्ग के योग्य उम्मीदवार पिछले कई सालों से सड़कों पर भटक रहे हैं।
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मायावती से दखल की मांग: अभ्यर्थियों का कहना था कि मायावती हमेशा से दलितों और पिछड़ों की राजनीति करती आई हैं, इसलिए वे चाहते हैं कि बसपा सुप्रीमो खुद बाहर आएं, उनका ज्ञापन लें और इस महा-घोटाले के खिलाफ उनके आंदोलन को खुलकर अपना समर्थन दें। उनका आरोप है कि विपक्ष इस गंभीर मुद्दे पर उतनी मजबूती से आवाज नहीं उठा रहा है, जितनी जरूरत है।
पुलिस की कार्रवाई और तीखी नोकझोंक
जैसे ही सैकड़ों अभ्यर्थी मायावती के आवास के सामने सड़क पर धरने पर बैठे, स्थानीय प्रशासन और पुलिस के हाथ-पॉंव फूल गए। वीआईपी इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए तुरंत कई थानों की पुलिस और पीएसी (PAC) के जवानों को तैनात किया गया।
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जबरन हटाया गया: पुलिस अधिकारियों ने पहले प्रदर्शनकारियों को वहां से शांतिपूर्वक हटने के लिए समझाया, लेकिन जब अभ्यर्थी अपनी मांग पर अड़े रहे और नारेबाजी तेज कर दी, तो पुलिस ने एक्शन लिया।
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इको गार्डन भेजा गया: पुलिस ने महिला और पुरुष अभ्यर्थियों को घसीटकर बसों में भरना शुरू किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी देखने को मिली। हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को पुलिस बसों में भरकर लखनऊ के धरना स्थल 'इको गार्डन' ले गई है।
क्या है 69000 शिक्षक भर्ती का पूरा विवाद?
यह पूरा मामला साल 2018 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निकाली गई 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती से जुड़ा है।
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आरक्षण विसंगति का आरोप: परीक्षा और परिणाम के बाद, ओबीसी (OBC) और एससी (SC) वर्ग के अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि बेसिक शिक्षा विभाग ने इस भर्ती में आरक्षण नियमों (Reservation Policy) का सही से पालन नहीं किया, जिससे उनकी हजारों सीटों पर सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों का चयन हो गया।
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6800 की सूची पर रोक: सरकार ने बाद में अपनी गलती मानते हुए विसंगति सुधारने के लिए 6800 अभ्यर्थियों की एक अतिरिक्त सूची जारी की थी, लेकिन यह मामला कोर्ट में फंस गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच द्वारा पूरी मेरिट लिस्ट को दोबारा री-विजिट (संशोधित) करने के आदेश के बाद भी यह मामला कानूनी और राजनीतिक दांवपेंचों में अटका हुआ है, जिसके कारण अभ्यर्थी लगातार आंदोलन कर रहे हैं।