UP चुनाव 2027 से पहले ओवैसी का बड़ा ऐलान! अकेले नहीं लड़ेंगे चुनाव, गठबंधन पर बढ़ी हलचल
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी राज्य में अकेले चुनावी मैदान में उतरने के मूड में नहीं है। एक टीवी साक्षात्कार में ओवैसी ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि वे यूपी में समान विचारधारा वाले दलों के साथ मजबूत गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ना चाहते हैं। इसके साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोलते हुए अखिलेश यादव की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े किए।
चंद्रशेखर आज़ाद की 'ASP' से गठबंधन की चर्चा, जल्द औपचारिकता पूरी होने की उम्मीद
साक्षात्कार के दौरान ओवैसी ने संकेत दिया कि उनकी पार्टी नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद की पार्टी 'आज़ाद समाज पार्टी (कांशी राम)' सहित कई अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन को लेकर लगातार संपर्क में है। बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और जल्द ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। ओवैसी ने कहा कि वे अकेले चुनाव नहीं लड़ना चाहते बल्कि एक व्यापक मोर्चे का हिस्सा बनना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि राजनीति में अंतिम समय तक किसी चीज की गारंटी नहीं होती, लेकिन उनकी पूरी कोशिश एक मजबूत चुनावी तालमेल बनाने की है।
'हारते खुद हैं और दोष हम पर मढ़ते हैं': समाजवादी पार्टी पर साधा निशाना
ओवैसी ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने सपा द्वारा एआईएमआईएम को अक्सर भाजपा की 'बी टीम' कहे जाने के आरोपों पर पलटवार किया। ओवैसी ने कहा कि जब सपा सत्ता में थी, तब वह 2014 के लोकसभा चुनाव हारी, फिर 2017 के विधानसभा चुनाव हारी, इसके बाद 2019 के आम चुनाव और 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उसे शिकस्त मिली। इन सभी पराजयों का ठीकरा सपा नेतृत्व खुद का आत्मनिरीक्षण करने के बजाय हमेशा एआईएमआईएम के सिर फोड़ता रहा है। ओवैसी ने खुलासा किया कि 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक तीन महीने पहले भी उन्होंने सपा के साथ गठबंधन की गंभीर पहल की थी, लेकिन सपा नेतृत्व ने सकारात्मक रुख नहीं दिखाया।
वक्फ संशोधन विधेयक और बुलडोजर एक्शन पर उठाए कड़े सवाल
उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर बात करते हुए एआईएमआईएम प्रमुख ने केंद्र और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में लाया गया वक्फ संशोधन विधेयक मुस्लिम समुदाय के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने और उन्हें सीमित करने के मकसद से तैयार किया गया है। ओवैसी ने कहा कि यूपी में 'रूल ऑफ लॉ' यानी कानून के शासन की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सहारनपुर से लेकर संभल तक कई मस्जिदों, कब्रिस्तानों और अल्पसंख्यकों के घरों पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए बुलडोजर चलाया गया।
'मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक समझा गया, असल मुद्दों पर सब खामोश'
ओवैसी ने सपा समेत मुख्य विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि आज अल्पसंख्यकों को सिर्फ वोट बैंक बनाकर छोड़ दिया गया है। जिन राजनीतिक दलों को मुसलमानों ने एकतरफा वोट देकर ताकत दी, वे आज समुदाय के बुनियादी मुद्दों, अधिकारों और उनके खिलाफ हो रही ज्यादतियों पर खुलकर बोलने से बचते हैं। उन्होंने कहा कि यूपी में जनता अब एक ऐसा राजनीतिक विकल्प तलाश रही है जो बिना किसी डर के उनके हक और इंसाफ की लड़ाई लड़ सके।