ट्रेन को बेपटरी करने की साजिश, पायलट ने ऐसे बचाई ट्रेन
उत्तर प्रदेश की संगम नगरी प्रयागराज में यमुनानगर जोन के अंतर्गत आने वाले घूरपुर थाना क्षेत्र में एक बार फिर ट्रेन को बेपटरी करने और बड़े हादसे को अंजाम देने की खौफनाक साजिश सामने आई है।
यहां डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के रेलवे ट्रैक पर अज्ञात अराजक तत्वों ने दुर्भावनापूर्ण इरादे से 7 फीट लंबी लोहे की भारी रेलिंग रख दी थी। यह पूरी वारदात 21 सितंबर की शाम करीब 7:15 बजे की है, जब किलोमीटर संख्या 272/7 के पास से मालगाड़ी ट्रेन (नंबर PRG 33 488, 32627) गुजर रही थी। गनीमत रही कि समय रहते खतरे को भांप लिया गया, जिससे एक बड़ा रेल हादसा होने से बाल-बाल बच गया।
लोको पायलट की सूझबूझ आई काम, टकराते ही रोकी ट्रेन
जिस समय ट्रेन ट्रैक से गुजर रही थी, ट्रैक पर रखी भारी लोहे की रेलिंग सीधे ट्रेन के इंजन के निचले हिस्से से टकराई। तेज धमाके जैसी आवाज सुनते ही लोको पायलट ने गजब की सतर्कता और आपातकालीन सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया। इसके बाद शाम करीब 7:25 बजे लोको पायलट ने तत्काल कंट्रोल रूम और वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों को घटना से अवगत कराया। अधिकारियों से निर्देश मिलते ही कर्मचारियों ने ट्रैक पर फंसी लोहे की भारी रेलिंग को हटाकर अप और डाउन लाइनों के बीच सुरक्षित स्थान पर रखा, जिसके बाद रेल यातायात को बहाल किया जा सका। डीएफसी अधिकारियों के अनुसार, यदि पायलट ने सेकंड भर की भी देरी की होती, तो ट्रेन के डिरेल होने से भारी तबाही मच सकती थी।
घूरपुर थाने में रेलवे एक्ट की धारा 150 के तहत गंभीर मुकदमा दर्ज
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस तुरंत हरकत में आ गईं। न्यू करछना में तैनात डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) के कार्यकारी सुरक्षा अधिकारी अमित कुमार मिश्र ने घूरपुर थाने में लिखित तहरीर दी। अमित कुमार मिश्र के कार्यक्षेत्र में किलोमीटर संख्या 271/00 से 280/00 तक का सुरक्षा व मेंटेनेंस दायित्व आता है। उनकी शिकायत के आधार पर घूरपुर थाना पुलिस ने 23 सितंबर की रात 10:29 बजे अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ रेलवे अधिनियम 1989 की अत्यंत सख्त धारा 150 (ट्रेन को दुर्भावनापूर्ण तरीके से नुकसान पहुंचाने या पलटाने का प्रयास) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और स्थानीय स्तर पर सुराग जुटाने में जुटी है।
DFC ट्रैक पर बार-बार साजिश, रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
यह कोई इकलौती घटना नहीं है जिसने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े किए हैं। इससे पहले भी डीएफसी और भारतीय रेलवे के प्रमुख रेल खंडों पर पटरियों के बीच भारी पत्थर, लोहे के गाटर, गैस सिलेंडर और कंक्रीट के खंभे रखकर ट्रेनों को निशाना बनाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। संवेदनशील फ्रेट कॉरिडोर पर लगातार हो रही ऐसी खुराफातें किसी संगठित साजिश की ओर इशारा करती हैं, जिसने रेलवे ट्रैक की पेट्रोलिंग और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।