यूपी में बिजली व्यवस्था पर बड़ा अपडेट, 31% से घटकर 17.83% हुआ घाटा, जानें कैसे हुआ कमाल

यूपी में बिजली व्यवस्था पर बड़ा अपडेट, 31% से घटकर 17.83% हुआ घाटा, जानें कैसे हुआ कमाल

उत्तर प्रदेश में विद्युत वितरण तंत्र को घाटे से उबारने और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए शुरू किए गए सुधारों के ठोस परिणाम सामने आने लगे हैं। पिछले कुछ वर्षों में बिजली वितरण के दौरान होने वाले तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2020-21 में 20.63 प्रतिशत पर रही वितरण हानि वर्ष 2025-26 में घटकर 13.04 प्रतिशत के निचले स्तर पर आ गई है। इसी अवधि के दौरान समग्र तकनीकी और वाणिज्यिक हानि (एटीएंडसी लॉस) भी 31.19 प्रतिशत से गिरकर 17.83 प्रतिशत पर पहुंच गई है। कृषि फीडरों को अलग रखकर देखें तो राज्यभर में कुल फीडरों के बुनियादी ढांचे में विस्तार हुआ है, जिससे मुनाफा देने वाले लाभकारी फीडरों की संख्या 5,772 से उछलकर 8,104 तक पहुंच चुकी है।

703 हाई लॉस क्लस्टरों पर सख्त निगरानी, ₹654 करोड़ की रिकॉर्ड वसूली

बिजली चोरी रोकने और भारी लाइन लॉस वाले संवेदनशील इलाकों में स्थिति सुधारने के लिए पावर कारपोरेशन ने 'हाई लॉस क्लस्टर मॉडल' पर विशेष रूप से काम किया। इस व्यवस्था के अंतर्गत राज्यभर के 703 चिन्हित क्लस्टरों और 1,703 फीडरों को 24 घंटे कड़ी तकनीकी निगरानी के दायरे में लाया गया। इन क्लस्टरों के दायरे में लगभग 42.21 लाख उपभोक्ता और 76,839 ट्रांसफार्मर जुड़े हुए हैं। इस सघन अभियान के चलते विभाग ने बकाएदारों से 654 करोड़ रुपये से अधिक के बकाए राजस्व की सीधी वसूली की है, साथ ही एक लाख से ज्यादा नए वैध घरेलू और वाणिज्यिक बिजली कनेक्शन भी जारी किए गए हैं।

दक्षिणांचल डिस्कॉम के घाटे में भी आई बड़ी गिरावट

सुधार की यह बयार दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के कार्यक्षेत्र में भी साफ तौर पर दर्ज की गई है। दक्षिणांचल क्षेत्र में वितरण हानि 25.64 प्रतिशत से सिमटकर 14.78 प्रतिशत रह गई है। वहीं इस क्षेत्र की एटीएंडसी हानि भी 31.03 प्रतिशत के चिंताजनक स्तर से कम होकर 19.57 प्रतिशत पर आ गई है।