अनोखा अंतिम संस्कार: पालतू कुत्ते की मौत पर इंसानों जैसी तेरहवीं, हवन-पूजन के बाद परोसा गया पसंदीदा लड्डू
उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर से बेजुबान जानवर और इंसानों के बीच अटूट रिश्ते व आत्मीयता की एक भावुक कर देने वाली मिसाल सामने आई है। यहां एक परिवार ने अपने 12 साल पुराने पालतू डॉगी 'टफ्फू' के निधन के बाद पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उसकी तेरहवीं का आयोजन किया।
शोक में परिजनों ने न केवल पंडितों को बुलाकर हवन-पूजन कराया, बल्कि मोहल्ले वालों और रिश्तेदारों के लिए बाकायदा एक भव्य भोज का आयोजन भी किया। इस भोज में तरह-तरह के स्वादिष्ट व्यंजनों के अलावा टफ्फू के पसंदीदा बेसन के लड्डू खासतौर पर बनवाकर बांटे गए। डॉगी की जुदाई के गम में परिवार इस कदर टूट गया था कि उसके जाने के बाद लगातार तीन दिनों तक घर के चूल्हे में आग तक नहीं जली थी।
12 साल पुराना नाता: कॉलेज के परिसर से घर का लाडला बनने तक की कहानी
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रायबरेली के रहने वाले सुनील यादव पिछले 16 वर्षों से मेरठ में रह रहे हैं और स्थानीय डीएन इंटर कॉलेज में बतौर माली कार्यरत हैं। परिवार में उनकी पत्नी सुनीता, 18 वर्षीय बेटी वर्षा और 17 वर्षीय बेटा शिवम हैं। करीब 12 साल पहले इसी कॉलेज परिसर में एक देसी नस्ल की डॉग ने पिल्लों को जन्म दिया था, जिसमें से एक छोटे बच्चे को सुनील प्यार से अपने घर ले आए थे। वक्त गुजरने के साथ-साथ यह डॉगी परिवार के पांचवें सदस्य की तरह घुल-मिल गया। वह घर के हर सदस्य की आहट और आवाज को बखूबी पहचानता था तथा कौन अपना है और कौन बाहरी, इसकी उसे गहरी समझ थी।
बहन वर्षा बांधती थी राखी, भाई की तरह 12 साल तक निभाया रिश्ता
सुनील यादव ने बताया कि उनकी बेटी वर्षा ने ही बचपन में उसका नाम बड़े लाड़-प्यार से 'टफ्फू' रखा था। वर्षा उसे महज एक जानवर नहीं बल्कि अपना सगा भाई मानती थी। पिछले 12 सालों से हर रक्षाबंधन के पावन पर्व पर वर्षा अपने भाई शिवम के साथ-साथ टफ्फू की कलाई पर भी रक्षासूत्र बांधती आ रही थी। इस साल भी उसने पूरे स्नेह के साथ टफ्फू को राखी बांधी थी। परिवार में किसी का जन्मदिन हो या कोई अन्य तीज-त्योहार, टफ्फू हर खुशी के मौके पर परिवार के साथ शरीक होता था।
बचपन के साथी की जुदाई: वर्षा और शिवम के साथ बीता था बचपन
वर्षा ने नम आंखों से यादें साझा करते हुए बताया कि जब वे छोटे थे, तब सभी ने अपनी पसंद से पिल्लों को चुना था और टफ्फू उसका अपना साथी बना था। वे दोनों एक साथ खेलकर बड़े हुए थे। वर्षा कहती हैं कि उसका एक भाई शिवम है और दूसरा भाई टफ्फू था। शिवम के लिए भी वह बचपन का सबसे भरोसेमंद दोस्त था, जिसने 12 साल तक हर सुख-दुख साझा किया। घर में किसी के भी आने-जाने पर वह अपनी खास भाव-भंगिमाओं से प्रतिक्रिया देकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराता था।
अचानक बिगड़ी तबीयत और क्लीनिक में तोड़ा दम
परिजनों के अनुसार रक्षाबंधन के दिन बाहर से आने के बाद अचानक टफ्फू की तबीयत बिगड़ने लगी और उसे चक्कर आने लगे। उसकी ऐसी हालत देखकर मां सुनीता फूट-फूटकर रोने लगीं। परिजनों ने तुरंत पास के पशु चिकित्सक से संपर्क किया, जिससे प्राथमिक उपचार के बाद कुछ राहत मिली। लेकिन दो-तीन दिन बाद उसकी सेहत फिर से तेजी से बिगड़ने लगी। लगातार डॉक्टरों को घर बुलाने और क्लीनिक ले जाने के बावजूद जब कोई सुधार नहीं हुआ, तो उसे एक अन्य विशेषज्ञ क्लीनिक ले जाया गया। वहां डॉक्टर ने चार इंजेक्शन लगाए और जांच कराने की सलाह दी, लेकिन टेस्ट होने से पहले ही शाम को उसने दम तोड़ दिया।
तीन दिन तक नहीं जला चूल्हा, हवन और भोज के साथ दी भावभीनी विदाई
टफ्फू की आकस्मिक मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। परिजनों ने घर के पास ही नम आंखों से उसे जमीन में दफनाकर विदाई दी। दुख के कारण लगातार तीन दिनों तक घर में किसी ने अन्न का दाना नहीं चखा। मौत के 13 दिन पूरे होने पर परिवार ने सामाजिक मान्यताओं के अनुसार पूरी श्रद्धा से तेरहवीं का आयोजन किया। रविवार सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत हवन संपन्न हुआ, जिसके बाद पड़ोसियों, शुभचिंतकों और रिश्तेदारों को प्रसाद व भोजन कराकर टफ्फू की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। इलाके में इस अनोखे प्रेम और तेरहवीं की चर्चा हर जुबान पर है।