कचरा बना देगा पेट्रोल! वैज्ञानिकों ने खोज निकाला प्लास्टिक से ईंधन बनाने का नया तरीका

कचरा बना देगा पेट्रोल! वैज्ञानिकों ने खोज निकाला प्लास्टिक से ईंधन बनाने का नया तरीका

पूरी दुनिया में लगातार विकराल रूप धारण कर रहा प्लास्टिक प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरण के लिए संकट नहीं, बल्कि ऊर्जा का बड़ा स्रोत बनने की राह पर है। रोजमर्रा के जीवन में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक की वस्तुएं जब कचरे में तब्दील हो जाती हैं, तो उन्हें रीसायकल करना बेहद जटिल और खर्चीला साबित होता रहा है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इस वैश्विक समस्या का क्रांतिकारी हल निकाल लिया है।

संयुक्त राज्य अमेरिका के टेनेसी स्थित प्रतिष्ठित ओक रिज नेशनल लैबोरेटरी (ORNL) के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी नई रासायनिक प्रक्रिया विकसित की है, जो प्लास्टिक कचरे को तोड़कर उसे सीधे पेट्रोल (गैसोलीन) और डीजल जैसे उपयोगी ईंधनों में बदल सकती है।

पॉलीइथिलीन पर हुआ सफल परीक्षण: मिला 60 फीसदी तक गैसोलीन

शोधकर्ताओं की टीम ने अपना मुख्य प्रयोग पॉलीइथिलीन प्लास्टिक पर केंद्रित किया, जो दुनिया भर में पैकेजिंग, थैलियों और बोतलों में सबसे ज्यादा उपयोग किया जाने वाला प्लास्टिक पॉलीमर है। प्रयोगशाला में परीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने इस जटिल पॉलीमर को विघटित करने के लिए गर्म लवणों (Molten Salts) के एक बेहद सरल मिश्रण का उपयोग किया। इस प्रक्रिया में महज 200 डिग्री सेल्सियस के नियंत्रित तापमान पर प्लास्टिक तेजी से रूपांतरित हो गया और शोधकर्ताओं को लगभग 60 प्रतिशत गैसोलीन ईंधन प्राप्त करने में अभूतपूर्व सफलता मिली।

पारंपरिक तरीकों से काफी कम तापमान, बिना किसी सॉल्वेंट के बड़ा कमाल

इस अध्ययन से जुड़े वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि 200 डिग्री सेल्सियस का तापमान आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक तकनीकों की तुलना में बहुत कम है। सामान्य तौर पर प्लास्टिक को विघटित कर रीसायकल करने के लिए 450 से 500 डिग्री सेल्सियस या उससे भी अधिक उच्च तापमान और भारी ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, इस नई विधि में उन कई महंगे रसायनों, उत्प्रेरकों (Catalysts) और सॉल्वेंट्स की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ी, जो अब तक प्लास्टिक-टू-फ्यूल प्रक्रियाओं में अनिवार्य माने जाते थे।

पिघले हुए लवणों से हुआ चमत्कार: वैज्ञानिक झेनझेन यांग ने समझाया विज्ञान

इस पूरी रासायनिक प्रक्रिया के केंद्र में एल्युमिनियम क्लोराइड युक्त पिघले हुए लवण (Molten Salts) शामिल हैं। ये विशेष प्रकार के अकार्बनिक लवण होते हैं, जिन्हें तरल अवस्था में आने तक गर्म किया जाता है।

अध्ययन के सह-लेखक झेनझेन यांग के अनुसार, टीम ने बाजार में आसानी से मिलने वाले कमर्शियल अकार्बनिक लवणों को रिएक्शन माध्यम के तौर पर इस्तेमाल किया और पॉलीमर कचरे को ईंधन में बदल दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि विज्ञान के इतिहास में यह पहली बार संभव हुआ है जब किसी अतिरिक्त उत्प्रेरक इनिशिएटर या बाहरी सॉल्वेंट के बिना और इतने कम तापमान पर कचरे से उच्च मूल्य वाले रसायन और हाइड्रोकार्बन तैयार किए गए हैं।

लंबी कार्बन चेन को तोड़कर कैसे बना शुद्ध ईंधन

वैज्ञानिक यह गहराई से समझना चाहते थे कि आखिर पिघले हुए लवणों ने इतनी आसानी से प्लास्टिक के आणविक ढांचे को कैसे बदल दिया। दरअसल, पॉलीइथिलीन प्लास्टिक कार्बन और हाइड्रोजन परमाणुओं की बहुत लंबी और मजबूत आणविक श्रृंखला (चेन) से मिलकर बना होता है। शोध दल के तकनीकी विश्लेषण में पाया गया कि पिघले हुए सॉल्ट के भीतर मौजूद एल्युमिनियम साइट्स अत्यधिक एसिडिक (अम्लीय) हो जाती हैं। यह अम्लीय वातावरण एक तीव्र रासायनिक प्रतिक्रिया शुरू करता है, जो प्लास्टिक की उस लंबी आणविक चेन को छोटे-छोटे हाइड्रोकार्बन अणुओं में तेजी से तोड़ देता है। ये छोटे हाइड्रोकार्बन अणु ठीक वही यौगिक होते हैं, जो व्यावसायिक पेट्रोल, डीजल और अन्य पारंपरिक ईंधनों में मुख्य घटक के रूप में पाए जाते हैं।