"पति से मन भर गया, देवर से करा दो शादी!" गोद में बच्चा लेकर अफसरों के दफ्तर पहुंची महिला
बागपत जिले में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के सत्यापन के दौरान एक बेहद अजीबोगरीब और चौंकाने वाला वाकया सामने आया है। यहां एक विवाहित महिला गोद में अपना मासूम बच्चा लेकर सीधे प्रशासनिक अफसरों के दफ्तर जा पहुंची और योजना के मंडप में दूसरी शादी करवाने की गुहार लगाने लगी। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह रही कि महिला के साथ उसका मौजूदा पति भी मौजूद था और दोनों ने अफसरों के सामने बेझिझक बयान दिया कि वे आपसी सहमति से अलग हो चुके हैं।
महिला ने अफसरों से साफ लफ्जों में कहा कि उसका अपने पति से मन भर चुका है और अब वह अपने देवर को पसंद करती है, इसलिए सामूहिक विवाह समारोह में वह अपने देवर के साथ सात फेरे लेना चाहती है। पत्नी की इस मांग पर बगल में खड़े पति ने भी हामी भरी और अफसरों से कहा कि उसकी पत्नी को अब वह नहीं, बल्कि उसका छोटा भाई पसंद है।
पंचायत के तलाकनामे की दलील, नियमों के आगे खारिज हुआ आवेदन
जब समाज कल्याण विभाग के अफसरों ने महिला के पहले से शादीशुदा होने पर आपत्ति जताई, तो दोनों ने ग्राम पंचायत में हुए समझौते का हवाला दिया। महिला ने पंचायत द्वारा लिखा गया कथित तलाकनामा अफसरों की मेज पर रख दिया और दावा किया कि उनका सामाजिक रूप से तलाक हो चुका है। पति ने भी अपनी पत्नी के पक्ष में खुलकर गवाही दी।
हालांकि, प्रशासनिक अफसरों ने दो टूक स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम अथवा भारतीय कानून में ग्राम पंचायत द्वारा कराए गए तलाक की कोई कानूनी मान्यता नहीं है। वैध कानूनी डिक्री के बिना पहला विवाह अस्तित्व में माना जाता है। ऐसे में सरकारी योजना के तहत देवर से पुनर्विवाह का यह अजीबोगरीब आवेदन पूरी तरह गैर-कानूनी और नियमों के विपरीत पाया गया, जिसके चलते समाज कल्याण विभाग ने इसे तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।
220 आवेदनों में से 149 जोड़ों का हुआ विवाह
जिला समाज कल्याण अधिकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत जिले भर से कुल 220 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए थे। विभागीय जांच और पात्रता सत्यापन के उपरांत 25 अक्टूबर को 149 पात्र जोड़ों का वैदिक रीति-रिवाज से सामूहिक विवाह संपन्न करा दिया गया है। दस्तावेजों में खामियां पाए जाने पर कई अपात्र आवेदनों को पहले ही बाहर कर दिया गया था। इसी जांच प्रक्रिया के दौरान देवर से शादी रचाने की जिद पर अड़ी इस महिला का मामला प्रकाश में आया था, जिसे विधिसम्मत न होने के कारण सूची से बाहर कर दिया गया।