स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर योगी सरकार का बड़ा प्लान, 450 मास्टर ट्रेनर होंगे तैयार
उत्तर प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं को सुरक्षित शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने और उनके भीतर नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए योगी सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है।
विद्यालयों में पहले से सक्रिय 'मीना मंच' की गतिविधियों को अब जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाया जाएगा। इस व्यापक कार्ययोजना के अंतर्गत प्रयागराज स्थित राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान (एसआईईटी) में इसी सितंबर माह से राज्यस्तरीय विशेष आवासीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन होने जा रहा है।
75 जनपदों से चुने गए 450 प्रतिनिधि बनेंगे मास्टर ट्रेनर
इस राज्यव्यापी प्रशिक्षण अभियान के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों से 450 चुनिंदा प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। प्रतिभागियों की बड़ी संख्या को देखते हुए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को अलग-अलग बैचों में विभाजित किया जाएगा, जिससे प्रत्येक शिक्षक और नोडल प्रभारी को मीना मंच की संचालन नियमावली और संवाद तकनीकों का गहन व्यावहारिक ज्ञान मिल सके। यहां से प्रशिक्षित होने के बाद ये सभी प्रतिभागी मास्टर ट्रेनर के तौर पर अपने-अपने गृह जनपदों के स्कूलों में जाकर स्थानीय शिक्षकों और छात्राओं को प्रशिक्षित करेंगे।
बाल सुरक्षा और लैंगिक संवेदनशीलता पर विशेष फोकस
प्रशिक्षण मॉड्यूल में छात्राओं से जुड़े संवेदनशील और गंभीर विषयों को प्राथमिकता दी गई है। कार्यशाला के दौरान मास्टर ट्रेनरों को सिखाया जाएगा कि वे स्कूलों में बच्चियों को बाल सुरक्षा के नियमों, गुड टच-बैड टच और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर अपराधों की पहचान और उनके खिलाफ आवाज उठाने के लिए किस तरह सहजता से जागरूक करें। इसके साथ ही किसी भी विपरीत परिस्थिति में हेल्पलाइन नंबरों के इस्तेमाल और त्वरित कानूनी व प्रशासनिक मदद पाने के तौर-तरीकों की जानकारी भी दी जाएगी।
निर्णय क्षमता और आत्मनिर्भरता से निखरेगा व्यक्तित्व
राज्य सरकार की इस पहल का मूल उद्देश्य विद्यालयों में बालिकाओं के भीतर झिझक को समाप्त कर उनके आत्मविश्वास को मजबूत करना है। मीना मंच के मंच से छात्राओं में निर्णय लेने की क्षमता, सार्वजनिक संवाद कौशल और तार्किक सोच का विकास किया जाएगा, ताकि वे सामाजिक कुरीतियों जैसे बाल विवाह और शिक्षा से वंचित होने की चुनौतियों का डटकर मुकाबला कर सकें। प्रशासनिक हलकों में मीना मंच के इस पुनर्गठन को प्रदेश की बेटियों को आत्मनिर्भर और निडर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।