"56 साल के हो गए, फिर भी बने घूम रहे हैं युवा!" योगी ने राहुल के सियासी वजूद की सरेआम उड़ा दी धज्जियां
उत्तर प्रदेश के चीफ मिनिस्टर योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में आयोजित एक जनसभा के दौरान कांग्रेस और उसके शीर्ष नेता राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक प्रहार किया। 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा के शुभारंभ से पहले जनसमूह को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने राहुल गांधी की तुलना दिवाली के फुस्स रॉकेट से की। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि जिस तरह कुछ रॉकेट आग लगाते ही आसमान में जाने के बजाय जमीन पर ही धुआं छोड़ देते हैं, ठीक वैसे ही राहुल गांधी का सियासी बारूद खत्म हो चुका है और कांग्रेस जब भी उन्हें दोबारा लॉन्च करने की कोशिश करती है, वे हर बार फुस्स साबित होते हैं।
कांग्रेस के चुनावी रवैये पर योगी ने कसा तंज
योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस के चुनावी रवैये पर तंज कसने के लिए एक ग्रामीण छात्र का रोचक किस्सा सुनाया जो हर साल इम्तिहान में फेल होने पर घर वालों को नए बहाने गिनाता है। सीएम ने कहा कि पहली बार फेल होने पर वह छात्र कहता है कि शिक्षक ने उसकी कॉपी गायब कर दी, दूसरी बार सवाल सिलेबस से बाहर आने की शिकायत करता है, तीसरी बार पेन की स्याही खत्म होने का रोना रोता है और चौथी बार यह दलील देता है कि बगल वाला छात्र इतनी तेजी से लिख रहा था कि वह घबरा गया। योगी ने कहा कि यही हाल आज कांग्रेस का है; 2014 से लेकर 2024 तक जनता निरंतर भाजपा को चुन रही है और कांग्रेस को नकार रही है, लेकिन आत्ममंथन करने के बजाय कांग्रेस कभी ईवीएम, कभी संवैधानिक संस्थाओं और कभी लोकतंत्र पर हार का ठीकरा फोड़ती है।
चीफ मिनिस्टर ने कहा कि चुनावी जीत मिलने पर कांग्रेस अपनी चतुराई का ढिंढोरा पीटती है, लेकिन शिकस्त मिलते ही लोकतंत्र को खतरे में बताने लगती है। गठबंधन की राजनीति पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि तमिलनाडु जैसे राज्यों में जब पूरा गठबंधन हार जाता है, तो कांग्रेस चुप्पी साध लेती है या साथियों का साथ छोड़ देती है, क्योंकि इनका कोई सच्चा साथी नहीं है। हार का सिलसिला इतना लंबा हो चुका है कि अब तो पराजय भी कांग्रेस से पूछती होगी कि इस बार उसका दोष किसके सिर मढ़ा जाएगा।
राहुल गांधी के राजनीतिक सफर की फेहरिस्त गिनाते हुए सीएम योगी ने कहा कि उन्हें 2004 में सांसद, 2007 में महासचिव, 2013 में उपाध्यक्ष और 2017 में अध्यक्ष बनाकर बार-बार पेश किया गया, जिसका नतीजा यह रहा कि 2019 में वे अपनी पारंपरिक अमेठी सीट भी हार गए। इसके बाद उन्हें दोबारा स्थापित करने के लिए भारत जोड़ो यात्रा, न्याय यात्रा और अधिकार यात्रा जैसी कवायदें की गईं, लेकिन वे सब भी कागज के रॉकेट की तरह बेअसर रहीं। उम्र पर कटाक्ष करते हुए चीफ मिनिस्टर ने कहा कि 56 साल की उम्र पार कर चुके नेता को अब भी 'युवा' बताया जा रहा है, जबकि वे युवावस्था काफी पीछे छोड़ चुके हैं। योगी ने साफ शब्दों में कहा कि जनता का विश्वास झूठे बहानों या कारनामों से नहीं, बल्कि धरातल पर किए गए ठोस विकास कार्यों से जीता जाता है।