सीएम पुष्कर सिंह धामी का कड़ा निर्देश, रेस्क्यू ऑपरेशन तेज
देवभूमि उत्तराखंड के ऊंचे और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों से इस समय एक बहुत बड़ी और संवेदनशील खबर सामने आ रही है, जहाँ मौसम के अचानक बिगड़े मिजाज के कारण उत्तरकाशी के ट्रैकिंग रूट्स पर कई पर्यटकों और ट्रैकर्स के फंसने की सूचना मिली है। इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत प्रभाव से प्रशासनिक अधिकारियों, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि हर हाल में सभी फंसे हुए ट्रैकर्स की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा इस पूरे बचाव अभियान की सीधी मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके और हर एक नागरिक को सुरक्षित उनके बेस कैंप तक पहुंचाया जा सके। पर्वतीय इलाकों में लगातार खराब हो रहे मौसम और बर्फीली हवाओं के बीच चलाए जा रहे इस हाई-लेवल रेस्क्यू मिशन ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि राज्य सरकार नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीर और तत्पर है।
उत्तरकाशी के दुर्गम ट्रेक और अचानक बदले मौसम के बीच फंसा पर्यटकों का दल
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित ऊंचे-ऊंचे पहाड़ और रोमांचक ट्रेकिंग मार्ग देश-विदेश के साहसी पर्यटकों को हमेशा से अपनी ओर आकर्षित करते रहे हैं, लेकिन कई बार यही खूबसूरती प्रकृति के रौद्र रूप के कारण एक बड़ा खतरा बन जाती है। पिछले कुछ दिनों से उत्तरकाशी के विभिन्न उच्च हिमालयी ट्रेक मार्गों पर अचानक भारी बर्फबारी, तेज बारिश और कम विजिबिलिटी के कारण तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसके चलते ट्रैकिंग के लिए गए कई दल अलग-अलग जगहों पर फंस गए हैं। इन ट्रैकर्स के पास राशन और अन्य जरूरी सामग्रियां भी धीरे-धीरे कम होने लगी थीं, जिससे उनके परिजनों और स्थानीय प्रशासन की चिंताएं काफी बढ़ गई थीं। जैसे ही स्थानीय पुलिस और आपदा नियंत्रण कक्ष को इस बात की सूचना मिली, तुरंत राहत और बचाव दल को बिना एक पल गंवाए एक्शन मोड में ला दिया गया ताकि समय रहते फंसे हुए लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके।
सीएम पुष्कर सिंह धामी की हाई-लेवल मीटिंग और अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में एक उच्चस्तरीय आपातकालीन बैठक बुलाई और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों से अब तक चलाए जा रहे बचाव कार्यों का पूरा ब्योरा लिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में अधिकारियों को यह निर्देश दिए कि राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई या प्रशासनिक सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर भारतीय वायुसेना (IAF) के हेलीकॉप्टरों की मदद से भी एयरलिफ्ट ऑपरेशन चलाया जाए। इसके साथ ही, सीएम धामी ने जिलाधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि भविष्य में ऐसे किसी भी अनधिकृत या जोखिम भरे ट्रेक पर खराब मौसम के दौरान पर्यटकों की आवाजाही को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाए, ताकि इस तरह के हादसों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। सरकार के इस त्वरित और सख्त रुख के बाद से प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह से मुस्तैद हो चुकी है और ग्राउंड जीरो पर रेस्क्यू टीमों ने अपनी रफ्तार कई गुना बढ़ा दी है।
आपदा प्रबंधन और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों का साहसिक अभियान, सुरक्षित स्थानों की ओर वापसी जारी
मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), स्थानीय पुलिस और पर्वतारोहण के जानकारों की विशेष टीमों ने उत्तरकाशी के उन दुर्गम रास्तों पर मोर्चा संभाल लिया है जहाँ ट्रैकर्स फंसे हुए थे। बचाव कर्मियों ने जान की परवाह किए बिना लगातार गिरते तापमान और बर्फीले रास्तों को पार करते हुए उन जगहों तक पहुंचना शुरू कर दिया है जहाँ पर्यटकों के होने की सूचना थी। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, कई ट्रैकर्स से संपर्क साध लिया गया है और उन्हें प्राथमिक चिकित्सा तथा गर्म भोजन उपलब्ध कराते हुए सुरक्षित रूप से नीचे बेस कैंप की तरफ लाया जा रहा है। मौसम की दुश्वारियों के बावजूद हमारे सुरक्षा बलों और आपदा कर्मियों का यह अदम्य साहस इस बात का प्रमाण है कि विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी वे नागरिकों की जान बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देते हैं।
पर्वतीय यात्राओं के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां और प्रशासन की नई एडवाइजरी
इस घटना के बाद उत्तराखंड शासन और पर्यटन विभाग ने एक बार फिर से सभी पर्यटकों, ट्रेकर्स और यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहद सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन की ओर से बार-बार यह अपील की जा रही है कि वे पहाड़ों पर जाने से पहले स्थानीय मौसम विभाग के पूर्व अनुमानों की जांच अवश्य कर लें और बिना पंजीकृत गाइड या अनुमति के किसी भी खतरनाक ट्रेक पर अकेले आगे बढ़ने का प्रयास बिल्कुल न करें। प्रकृति के इस विकराल रूप के आगे हमारी जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है, इसलिए सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करना ही समझदारी है। उत्तरकाशी में फंसे ट्रैकर्स को सुरक्षित वापस लाने के लिए चल रहा यह अभियान अपने अंतिम चरण में है, और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही सभी पर्यटकों को सकुशल उनके परिजनों तक पहुंचा दिया जाएगा।