उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के आंकड़ों पर सरकार का बड़ा बयान

उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के आंकड़ों पर सरकार का बड़ा बयान

देवभूमि उत्तराखंड के आर्थिक परिदृश्य, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से आयोजित किए गए बहुप्रतीक्षित 'उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर समिट' (Uttarakhand Global Investors Summit) को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ी हुई थी। विपक्षी दलों द्वारा समिट के दौरान हुए निवेश समझौतों (MoUs) और धरातल पर उतरने वाले प्रोजेक्ट्स के आंकड़ों को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे। इन तमाम राजनीतिक कयासबाजियों और आलोचनाओं पर विराम लगाते हुए अब उत्तराखंड सरकार ने बेहद कड़े और स्पष्ट शब्दों में अपनी सफाई पेश की है। राज्य के शासन में उच्च पदस्थ औद्योगिक सचिव ने एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया के सामने सारे आंकड़े खोलते हुए यह दावा किया है कि सरकार द्वारा जारी किया गया हर एक आंकड़ा पूरी तरह पारदर्शी और सार्वजनिक है। उन्होंने गर्व के साथ यह जानकारी दी कि विपक्ष के तमाम दावों के विपरीत, उत्तराखंड की धरती पर अब तक 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वास्तविक निवेश धरातल पर उतर चुका है, जिससे हजारों स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुले हैं।

विपक्ष के सवालों पर सरकार का पलटवार, कहा- हर मोर्चे पर पारदर्शी है कार्यप्रणाली

ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के बाद से ही विभिन्न राजनीतिक मंचों से यह सवाल पूछा जा रहा था कि जितने बड़े-बड़े एमओयू (Memorandums of Understanding) साइन किए गए थे, क्या वे जमीन पर भी उतरे हैं या यह सिर्फ कागजी आंकड़े हैं। इस पर उत्तराखंड सरकार के औद्योगिक सचिव ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि सरकार की नीयत और नीति दोनों बिल्कुल साफ हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि निवेशकों के साथ किए गए समझौतों को धरातल पर उतारने के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग सेल का गठन किया गया था, जो लगातार एक-एक प्रोजेक्ट की प्रगति पर पैनी नजर बनाए हुए है। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरों या राजनीतिक बयानों से निवेशकों का मनोबल प्रभावित न हो, इसके लिए हर छह महीने पर निवेश की जमीनी स्थिति की रिपोर्ट सार्वजनिक डोमेन में रखी जाती है। इस पारदर्शी दृष्टिकोण के कारण ही आज देश-दुनिया के नामी-गिरामी कॉर्पोरेट घरानों और निवेशकों का भरोसा देवभूमि पर लगातार और अधिक मजबूत हो रहा है।

कौन-से सेक्टर में आया है सबसे ज्यादा निवेश और कैसे मिल रहा है युवाओं को रोजगार?

उत्तराखंड में आए एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के इस भारी-भरकम निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा पर्यटन, आतिथ्य सत्कार (Hospitality), आयुष, स्वास्थ्य सेवाओं, फार्मास्यूटिकल्स, हरित ऊर्जा (Green Energy) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के क्षेत्रों में आया है। पहाड़ी जिलों में होमस्टे नीति और वेलनेस टूरिज्म को मिल रहे जबरदस्त समर्थन के कारण स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार की बयार बह रही है, जिससे ग्रामीण पलायन की समस्या पर भी काफी हद तक लगाम लगी है। इसके अलावा, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में उधम सिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून जैसे जिलों में नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से स्थानीय युवाओं के लिए तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों श्रेणियों में रोजगार के अनगिनत अवसर सृजित हुए हैं। सरकार का मुख्य फोकस इस बात पर रहा है कि निवेश केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका प्रत्यक्ष लाभ उत्तराखंड के मूल निवासियों और सीमांत क्षेत्रों के परिवारों तक पहुंचे।

भविष्य की औद्योगिक नीतियां और देवभूमि को आत्मनिर्भर बनाने का महाअभियान

उत्तराखंड सरकार का यह स्पष्ट मानना है कि राज्य की भौगोलिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए ही यहां औद्योगिक विकास को गति दी जा रही है। पर्यावरण और विकास के बीच एक संतुलन स्थापित करते हुए 'इको-फ्रेंडली इंडस्ट्रीज' को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिक नीति है। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट की इस सफलता के बाद अब शासन का पूरा जोर इस बात पर है कि आगामी वर्षों में राज्य की आर्थिकी को देश की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं की पंक्ति में खड़ा किया जाए। सचिव महोदय द्वारा पेश किए गए इन पुख्ता और पारदर्शी आंकड़ों ने विपक्ष के उन सभी आरोपों की हवा निकाल दी है जिनमें समिट की सफलता पर सवालिया निशान लगाए जा रहे थे। आने वाले समय में उत्तराखंड न केवल देश के शीर्ष धार्मिक और पर्यटन स्थलों में शुमार रहेगा, बल्कि औद्योगिक और आर्थिक मानचित्र पर भी एक मजबूत और आत्मनिर्भर राज्य के रूप में अपनी एक नई और सशक्त पहचान स्थापित करने में पूरी तरह सफल हो रहा है।