कब्रिस्तान की जमीन पर सैकड़ों मकान! वक्फ चेयरमैन के खुलासे से उत्तराखंड में सियासी हलचल
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने प्रदेश में वक्फ की बेशकीमती संपत्तियों और कब्रिस्तानों पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर बेहद तीखा रुख अपनाया है। शम्स ने खुलासा किया कि राज्य में कई स्थानों पर वक्फ की जमीनों पर धड़ल्ले से अवैध कब्जे किए गए हैं, जिसमें कब्रिस्तानों की जमीनें भी शामिल हैं।
उन्होंने राजधानी देहरादून के सहस्त्रधारा क्रॉसिंग स्थित आजादनगर कॉलोनी का सीधा हवाला देते हुए कहा कि वहां सैकड़ों लोग कब्रिस्तान की जमीन पर पक्के आशियाने बनाकर रह रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर दावा किया कि इनमें से अधिकतर लोग उत्तर प्रदेश के बिजनौर से आकर यहां बसे हैं।
वक्फ चेयरमैन ने मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा ही इन जमीनों पर कब्जा किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पूरे राज्य में बेदखली का अभियान शुरू हो चुका है और कब्जाधारियों को लगातार कानूनी नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
बिजनौर से आए लोगों पर गंभीर आरोप, बार-बार चेतावनी के बाद भी नहीं खाली की जमीन
शादाब शम्स ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि देहरादून के आजादनगर में कब्रिस्तान की जमीन को सुनियोजित तरीके से हड़पा गया है। शम्स के मुताबिक, यहां अवैध रूप से काबिज लोगों में बड़ी तादाद बिजनौर क्षेत्र से आए लोगों की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बोर्ड की तरफ से इन लोगों को पूर्व में कई बार स्वेच्छा से जमीन खाली करने की मोहलत दी गई थी, लेकिन लगातार चेतावनियों के बावजूद किसी ने जमीन से कब्जा नहीं हटाया। अब कानून के तहत सख्त कदम उठाना अनिवार्य हो गया है।
पिछली सरकारों पर तुष्टीकरण का आरोप, मुजफ्फरनगर सांसद को भी नोटिस का दावा
वक्फ संपत्तियों की इस बदहाली के लिए शादाब शम्स ने पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों से चल रही तुष्टीकरण की राजनीति के कारण इन अवैध कब्जों को राजनीतिक संरक्षण मिला, जिसके चलते लंबे समय तक प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। शम्स ने यह सनसनीखेज दावा भी किया कि कांग्रेस के मुजफ्फरनगर सांसद सहित कई रसूखदार लोगों को भी वक्फ बोर्ड की जमीन पर कब्जे को लेकर नोटिस जारी किए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि यह पूरी कार्रवाई बोर्ड के वैधानिक नियमों और दस्तावेजों के आधार पर की जा रही है।
'कब्रिस्तान में एक मुर्दा दफनाते हैं तो दूसरा बाहर आ जाता है'
कब्रिस्तानों की बदतर स्थिति को बयां करते हुए वक्फ चेयरमैन ने भावुक और कड़े शब्दों में जमीनी हकीकत सामने रखी। उन्होंने कहा कि तुष्टीकरण की सियासत के चलते हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि अब मृतकों को दफनाने के लिए जगह तक नहीं बची है। स्थिति यह हो गई है कि जब कब्रिस्तान में एक शव दफनाने के लिए कब्र खोदी जाती है, तो पहले से दफन दूसरा शव बाहर निकल आता है और उसकी हड्डियां दिखने लगती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कब्रिस्तानों की जमीन पर ही लोग घर बना लेंगे, तो आखिर आने वाली पीढ़ियां अपने परिजनों को कहां दफनाएंगी।
'कब्जा हटाने पर मुझे गैर-मुस्लिम बताते हैं, गलत है तो इस्तीफा देने को तैयार'
शादाब शम्स ने अपने ही समुदाय के अतिक्रमणकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि कब्रिस्तान की जमीन पर कब्जा किसी और ने नहीं बल्कि मुसलमानों ने ही किया है। एक वक्फ बोर्ड चेयरमैन के तौर पर इस पवित्र संपत्ति को कब्जामुक्त कराना उनका पहला फर्ज है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब वे अवैध कब्जेदारों पर डंडा चलाते हैं, तो वही लोग उन पर उंगली उठाते हैं और कहते हैं कि तुम सच्चे मुसलमान नहीं हो और जुल्म ढा रहे हो। शम्स ने दो टूक कहा कि अगर वक्फ की जमीन से अवैध कब्जा हटाना जुल्म है, तो वे तुरंत अपने पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं। उन्होंने तंज कसा कि अगर यही रवैया रहा तो फिर मेरठ, मुजफ्फरनगर और बिजनौर से और लोगों को बुलाकर बचे-खुचे कब्रिस्तानों पर भी कब्जा करा दिया जाए। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस की तुष्टीकरण नीति और यह गुंडागर्दी अब उत्तराखंड में नहीं चलने दी जाएगी।