चार धाम यात्रा में बड़ा बदलाव! पहाड़ों का सीना चीरकर दौड़ेंगी ट्रेनें, 12 स्टेशनों की लिस्ट जारी
उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में रेलवे कनेक्टिविटी को नया आयाम देने के लिए भारतीय रेलवे की 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना तेजी से आकार ले रही है। आधुनिक इंजीनियरिंग के इस चमत्कार के पूरा होने के बाद ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक का सफर, जिसमें वर्तमान में सड़क मार्ग से पूरा दिन लग जाता है, घटकर महज दो घंटे का रह जाएगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस महत्वाकांक्षी परियोजना का वीडियो साझा करते हुए इसकी तकनीकी खूबियों और प्रगति की जानकारी दी है।
इस रेल मार्ग की सबसे बड़ी खासियत इसका अंडरग्राउंड नेटवर्क है। कुल 125 किलोमीटर की दूरी में से लगभग 83 प्रतिशत हिस्सा यानी करीब 103 किलोमीटर का सफर लंबी सुरंगों (टनल) के भीतर से तय होगा। हिमालय की संवेदनशील भौगोलिक परिस्थितियों, नदियों और गहरी घाटियों को पार करने के लिए पूरे ट्रैक पर 19 बड़े पुलों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से 11 पुल बनकर तैयार हो चुके हैं और शेष का काम युद्धस्तर पर जारी है। साथ ही, पर्यावरण संतुलन और सुंदरता बढ़ाने के लिए ट्रैक के दोनों किनारों पर फूलों वाले पौधे लगाने की योजना बनाई गई है।
यह रेल नेटवर्क उत्तराखंड के पांच प्रमुख पहाड़ी जिलों—देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली को आपस में जोड़ेगा। परियोजना के तहत कुल 12 अत्याधुनिक रेलवे स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें ऋषिकेश, शिवपुरी, ब्यासी, देवप्रयाग, जनासू, मलेथा, श्रीनगर, धारी देवी, तिलानी, घोलतीर, गौचर और कर्णप्रयाग शामिल हैं। यह लाइन ऋषिकेश को सीधे देवप्रयाग और कर्णप्रयाग से जोड़कर यात्रा को बेहद सुगम बनाएगी।
धार्मिक पर्यटन के लिहाज से यह रेलवे लाइन चारधाम यात्रियों के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं होगी। वर्तमान में बद्रीनाथ और केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं को संकरे, खतरनाक और लैंडस्लाइड संभावित पहाड़ी रास्तों से होकर घंटों की थका देने वाली यात्रा करनी पड़ती है। इस रूट के शुरू होने से न केवल तीर्थयात्रियों का समय और जोखिम बचेगा, बल्कि गढ़वाल क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी अभूतपूर्व गति मिलेगी।