उत्तराखंड कांग्रेस में खुली बगावत; हाईकमान के फरमान को हरीश रावत ने दिखाया ठेंगा, बोले- ‘अब यात्रा नहीं रुकेगी!’
उत्तराखंड में अगले साल की शुरुआत (फरवरी-मार्च) में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस का अंदरूनी घमासान खुलकर सड़कों पर आ गया है। पार्टी नेतृत्व की सख्त हिदायत और दिल्ली तलब किए जाने के फरमान को दरकिनार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता हरीश रावत ने अपनी 'धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा' रोकने से साफ इनकार कर दिया है। रावत ने सोशल मीडिया पर यात्रा का अगला शेड्यूल साझा करते हुए हाईकमान के रुख के सामने झुकने से इनकार कर दिया, जिससे राज्य की सियासी हलचल तेज हो गई है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा ने 1 अक्टूबर को हरीश रावत को एक आधिकारिक पत्र भेजा। इस पत्र में उन्होंने रावत द्वारा निकाली जा रही यात्रा और हालिया बयानों पर गहरी नाराजगी जाहिर की थी। सैलजा ने साफ शब्दों में लिखा था कि रावत की इस यात्रा को लेकर न तो उनसे और न ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष से कोई सहमति या चर्चा की गई है।
कुमारी सैलजा ने पत्र के जरिए स्पष्ट संदेश दिया कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह के अलग और समानांतर कार्यक्रम चलाना पार्टी के संगठन और चुनावी हितों के लिए नुकसानदेह साबित होगा। उन्होंने रावत से अपील की थी कि वे इन कार्यक्रमों को तुरंत रोकें और पूरी पार्टी एकजुट होकर मैदान में उतरे। साथ ही मामले की गंभीरता को देखते हुए नेतृत्व ने उन्हें स्थिति स्पष्ट करने के लिए दिल्ली भी तलब किया था।
हाईकमान के इस कड़े रुख के बावजूद हरीश रावत ने पीछे हटने के बजाय आर-पार का मूड बना लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए अपने तेवर साफ कर दिए। रावत ने लिखा कि देवभूमि के स्वाभिमान के लिए उनका संकल्प दृढ़ है और इस मुश्किल चुनौती के बीच 'धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा' का सिलसिला अब किसी भी हाल में थमने वाला नहीं है। उन्होंने जसपुर से हल्द्वानी तक के अपने रूट की घोषणा करते हुए कार्यकर्ताओं से देवभूमि के हक और सत्ता परिवर्तन की लड़ाई में साथ जुड़ने का आह्वान किया। चुनाव से चंद महीने पहले वरिष्ठ नेता की इस खुली बगावत ने उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर गुटबाजी को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है।