सांस्कृतिक एकता की मिसाल: देवभूमि के शिवभक्त रामेश्वरम का पवित्र जल लेकर सोमनाथ रवाना
उत्तराखंड और गुजरात के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को एक नया आयाम देते हुए पिथौरागढ़ से श्रद्धालुओं का एक विशेष जत्था गुजरात के लिए रवाना हुआ है। 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के तहत आयोजित इस यात्रा में सीमांत जिले के 40 शिवभक्त प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ के दर्शन और विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। इस यात्रा दल को नगर निगम की मेयर कल्पना देवलाल और अपर जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने हरी झंडी दिखाकर गंतव्य के लिए विदा किया।
दो पवित्र धामों का अनूठा संगम
इस यात्रा की सबसे खास बात यह है कि उत्तराखंड से जा रहे ये श्रद्धालु अपने साथ दक्षिण भारत के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम से लाया गया पवित्र जल भी ले जा रहे हैं। इस पावन जल को एक कलश में सुरक्षित रखा गया है जिससे गुजरात में भगवान सोमनाथ का जलाभिषेक किया जाएगा। जनप्रतिनिधियों के मुताबिक यह आयोजन केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है बल्कि देश की सांस्कृतिक अखंडता और सनातन आस्था को एक सूत्र में पिरोने का एक बड़ा जरिया है।
दोनों सरकारों के सहयोग से पूरी तरह मुफ्त सफर
आम जनता और विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के श्रद्धालुओं के लिए यह एक सुनहरा अवसर है। उत्तराखंड सरकार और गुजरात पर्यटन विभाग के आपसी तालमेल से यह पूरी यात्रा पूरी तरह निशुल्क आयोजित की गई है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने जानकारी दी कि पर्यटन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के माध्यम से पारदर्शी तरीके से यात्रियों का चयन किया गया है। श्रद्धालुओं के लिए आने-जाने की सुविधा, ठहरने के उत्तम इंतजाम और भोजन की पूरी व्यवस्था सरकारों द्वारा मुफ्त की गई है ताकि उन्हें सफर में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।
जत्थे में महिलाओं और पुरुषों की भागीदारी
पर्यटन विभाग के उप निदेशक अतुल भंडारी ने यात्रा दल के ढांचे की जानकारी देते हुए बताया कि पिथौरागढ़ से गए इस 40 सदस्यीय दल में 33 पुरुष और 7 महिलाएं शामिल हैं। इस पूरी मुहिम का मुख्य ध्येय अलग-अलग राज्यों के नागरिकों के बीच अपनी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रति गौरव की भावना को और ज्यादा मजबूत करना है।