निठारी कांड के सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में लगाई फांसी: 3 दिन पहले खोली थी चाय की दुकान, सुप्रीम कोर्ट से हुआ था बरी

निठारी कांड के सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में लगाई फांसी: 3 दिन पहले खोली थी चाय की दुकान, सुप्रीम कोर्ट से हुआ था बरी

देश को हिलाकर रख देने वाले बहुचर्चित निठारी हत्याकांड से जुड़े सुरेंद्र कोली ने उत्तराखंड के हरिद्वार में फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली है। हरिद्वार के उत्तरी क्षेत्र भूपतवाला इलाके में स्थित एक मंदिर के सामने उसने चाय की दुकान में फांसी लगा ली।

हैरान करने वाली बात यह है कि कोली ने महज तीन दिन पहले ही यह दुकान शुरू की थी। प्रारंभिक पुलिस जांच में इस आत्मघाती कदम के पीछे की वजह पारिवारिक कलह बताई जा रही है, हालांकि पुलिस सभी संभावित पहलुओं से मामले की गहन तफ्तीश में जुट गई है।

भूपतवाला के लालमाता मंदिर के सामने चाय की दुकान में मिला शव

मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण स्थित मंगरुखाल गांव का रहने वाला सुरेंद्र कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में अपना ठिकाना बनाए हुए था। हरिद्वार शहर कोतवाली के अंतर्गत सप्त ऋषि पुलिस चौकी को सुबह सूचना मिली कि सप्त सरोवर रोड पर लालमाता मंदिर के सामने स्थित एक चाय की दुकान में कोली का शव फंदे से लटक रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और घटनास्थल की विस्तृत पड़ताल की।

सुरक्षा गार्ड की नौकरी छोड़ शुरू किया था चाय का खोखा

हरिद्वार के पुलिस अधिकारी कुंदन सिंह राणा के अनुसार, कोली ने कुछ ही दिनों पहले यह चाय का खोखा किराए पर लिया था। इससे पहले वह इलाके में एक निजी सुरक्षा गार्ड (सिक्योरिटी गार्ड) के रूप में काम करके अपना गुजारा कर रहा था। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। प्राथमिक तौर पर पारिवारिक क्लेश की बात सामने आ रही है, लेकिन मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए आसपास के लोगों और परिचितों से पूछताछ की जा रही है। अल्मोड़ा में मौजूद उसके परिजनों को घटना की आधिकारिक सूचना दे दी गई है।

2006 का खौफनाक निठारी कांड और सुप्रीम कोर्ट का फैसला

दिसंबर 2006 में नोएडा के सेक्टर 31 स्थित मोनिंदर सिंह पंढेर की कुख्यात D-5 कोठी के नाले से कई मासूम बच्चों और महिलाओं के नरकंकाल व अवशेष बरामद हुए थे। इस बर्बर कांड ने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया था। उस वक्त पुलिस ने कोठी के नौकर सुरेंद्र कोली और मालिक पंढेर को गिरफ्तार किया था। कोली पर हत्या, दुष्कर्म और अमानवीय कृत्यों के 16 मुकदमे दर्ज किए गए थे, जिनमें निचली अदालत और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी। बाद में 2015 में फांसी उम्रकैद में बदली और आखिरकार 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में सुरेंद्र कोली को सभी मामलों में निर्दोष करार देते हुए रिहा करने का ऐतिहासिक आदेश दिया था। इससे पहले मुख्य आरोपी मनेंद्र सिंह पंढेर भी बरी हो चुका था। जेल से बाहर आने के बाद कोली हरिद्वार में गुमनाम जिंदगी बिताने की कोशिश कर रहा था, जहां अब उसकी मौत की खबर सामने आई है।