कांग्रेस ने क्यों छोड़ दिया मैदान; दिनेश आर्य का निर्विरोध सांसद बनना तय, जानिए बंद कमरे की इनसाइड स्टोरी!
उत्तराखंड से राज्यसभा की रिक्त हो रही इकलौती सीट के लिए सियासी तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी दिनेश आर्य ने मंगलवार को विधानसभा भवन पहुंचकर निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। नामांकन के अंतिम दिन आयोजित इस प्रक्रिया के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट सहित कई कैबिनेट मंत्री और विधायक मौजूद रहे। विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा इस चुनाव में अपना कोई भी प्रत्याशी न उतारे जाने के कारण दिनेश आर्य का संसद के उच्च सदन के लिए निर्विरोध चुना जाना पूरी तरह तय हो गया है, जिसकी औपचारिक घोषणा 9 अक्टूबर को नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद की जाएगी।
यह सीट मौजूदा राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल आगामी 25 नवंबर को पूरा होने के चलते रिक्त हो रही है। विधानसभा में संख्याबल और सियासी समीकरणों को देखते हुए कांग्रेस ने मुकाबले से दूरी बनाए रखी। इससे पूर्व सोमवार को आर्य ने निर्वाचन कार्यालय से नामांकन पत्र खरीदा था, जहां दो अन्य लोगों ने भी पर्चे लिए थे, लेकिन दलीय संख्याबल के चलते मुकाबला एकतरफा ही रहा।
सियासी विश्लेषकों के अनुसार, संगठन के पुराने कार्यकर्ता दिनेश आर्य को उच्च सदन भेजकर भाजपा नेतृत्व ने एक बड़ा सामाजिक और रणनीतिक दांव चला है। आर्य लंबे अरसे तक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। जमीनी स्तर पर संगठन से जुड़े आर्य स्वयं नैनीताल सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में थे, मगर केंद्रीय नेतृत्व ने सीधे राज्यसभा का टिकट देकर सबको चौंका दिया। इस फैसले को हाल ही में हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम के बाद मैदान में हुए 'शुद्धिकरण' विवाद और कांग्रेस द्वारा बनाए जा रहे दलित विमर्श की मजबूत राजनीतिक काट के रूप में भी देखा जा रहा है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पार्टी ने एक बार फिर साबित किया है कि साधारण पृष्ठभूमि के निष्ठावान कार्यकर्ताओं का सम्मान केवल भाजपा में ही संभव है। उन्होंने वर्ष 2022 में कल्पना सैनी को उच्च सदन भेजने के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्य के सांगठनिक और प्रशासनिक अनुभवों का सीधा लाभ उत्तराखंड की जनता को मिलेगा।