आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान की आवाम आज केंद्रीय और प्रांतीय सरकार के इलेक्शनों के लिए मतदान कर रही है. पाकिस्तान का ये इलेक्शन कई विवादों के कारण चर्चा में रहा है.
इलेक्शन चिन्ह को लेकर भी ऐसा ही विवाद खड़ा हुआ था, जब चुनाव आयोग ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के चुनाव चिन्ह बल्ले को खारिज कर दिया था. अब इमरान खान की पार्टी के नेता निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए हैं और उन्हें मिलने वाले चुनाव चिन्हों को लेकर फिलहाल चर्चा चल रही है. इस बीच पाकिस्तान में चुनाव के लिए उम्मीदवारों को जो सिंबल दिए गए हैं वो काफी मजेदार हैं।
राजनीतिक दलों को 150 और अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों को 174 चुनाव चिह्न दिए गए हैं. इनमें गधा गाड़ी, प्रेसिंग बोर्ड, कटोरा, चिकन, बैंगन, बूट, वॉश बेसिन, नेल कटर, मोबाइल फोन चार्जर, सिम कार्ड, पेंच, चम्मच, पैन, गुब्बारा, घंटी, साइकिल, दूरबीन, बाल्टी, बल्ब, तितली, ऊंट शामिल हैं। तोप, कुर्सी, दीपक, मगरमच्छ, हाथी, पंखा, मछली, फव्वारा, दरवाजा, गोफन, प्रेस, जीप, झाड़ू, चाबी, सीढ़ी, कप, बंदूक, अंगूठी, ऑटोरिक्शा, हेलमेट, स्ट्रीट लाइट, तलवार, ट्रैक्टर और टायर चुनाव चिन्ह दिये गए हैं।
हाल ही में इमरान खान की पार्टी का चुनाव चिन्ह बल्ला चुनाव मैदान से हटा लिया गया था, जिस पर भारी हंगामा हुआ था। लेकिन ये पहली बार नहीं है कि पाकिस्तान में किसी चुनाव चिन्ह को लेकर दंगा हुआ हो. पहले भी चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद हो चुका है. इस बीच निर्दलीय उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह चुनने का मौका दिया जाता है, लेकिन कई बार चुनाव अधिकारी उन्हें चुनाव चिन्ह दे देते हैं और अजीब चुनाव चिन्ह प्रत्याशी को परेशानी में डाल देता है।
लोकतंत्र में चुनाव एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। चुनाव के दौरान देश की जनता अपनी पसंद का उम्मीदवार चुनती है। जहां ये चुनाव कभी वोटिंग मशीनों से तो कभी मतपत्रों से होते हैं. इन दोनों तरीकों में उम्मीदवार की फोटो मतदाता को दिखाई नहीं देती है। ऐसे में वह उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिन्ह देखकर वोट करता है।
पाकिस्तान की जनता भी अपनी नई सरकार बनाने के लिए आज यानी गुरुवार को मतदान कर रही है. पाकिस्तान एक ऐसा देश है जहां की 40 फीसदी से ज्यादा आबादी पढ़-लिख नहीं सकती। ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 50 फीसदी तक पहुंच जाता है. ऐसे में उनके लिए उम्मीदवार की पहचान ही उनका चुनाव चिन्ह बन जाता है।




