Up kiran,Digital Desk : वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की वार्षिक बैठक में भारत की आर्थिक दिशा को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत आने वाले पांच वर्षों में वास्तविक रूप से 6 से 8 प्रतिशत और नाममात्र आधार पर 10 से 13 प्रतिशत की मजबूत विकास दर बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि मध्यम महंगाई, मजबूत घरेलू मांग और लगातार हो रहे संरचनात्मक सुधार भारत की ग्रोथ को स्थिर आधार प्रदान कर रहे हैं। दावोस में दिए गए इस बयान को वैश्विक निवेशकों के लिए भरोसे का संदेश माना जा रहा है।
दावोस में ‘बेट ऑन इंडिया’ का संदेश
‘बेट ऑन इंडिया—बैंक ऑन द फ्यूचर’ सत्र में बोलते हुए अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि भारत की आर्थिक वृद्धि केवल सरकारी खर्च पर निर्भर नहीं है। निजी निवेश, टेक्नोलॉजी का विस्तार और नीतिगत सुधार देश की ग्रोथ के मुख्य इंजन हैं। यह सत्र भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और ईवाई के सहयोग से आयोजित किया गया था। मंत्री ने कहा कि अनुमति प्रक्रियाओं को सरल बनाकर निवेश के रास्ते को पहले से कहीं अधिक आसान किया गया है।
प्रशासनिक और टेलीकॉम सुधारों से तेज हुई रफ्तार
मंत्री वैष्णव ने सुधारों का उदाहरण देते हुए बताया कि टेलीकॉम टावर लगाने की औसत अवधि 270 दिनों से घटकर केवल सात दिन रह गई है। उन्होंने कहा कि अब करीब 89 प्रतिशत अनुमतियां जीरो टाइम में मिल रही हैं। उनका जोर इस बात पर था कि नीति के इरादे और जमीनी क्रियान्वयन के बीच की दूरी कम करना जरूरी है, ताकि सुधारों का असर तेजी से दिखे।
उद्योग, डेटा नीति और टेक्नोलॉजी पर फोकस
सत्र के दौरान उद्योग जगत से जुड़े अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इसमें उद्योग और सरकार के बीच खुले संवाद की जरूरत, डेटा लोकलाइजेशन नियमों के मानकीकरण के लिए अमेरिका और यूरोप के साथ तालमेल, निवेश के लिए स्पष्ट और एकरूप नियमों की आवश्यकता तथा टेक्नोलॉजी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ग्रोथ का प्रमुख चालक मानने जैसे बिंदु शामिल रहे।
2047 तक आय पांच गुना करने का रोडमैप
सीआईआई के अध्यक्ष राजीव मेमानी ने कहा कि भारत की प्रति व्यक्ति आय अभी भी अपेक्षाकृत कम है और 2047 तक इसे कम से कम पांच गुना करना जरूरी है। इसके लिए व्यापारिक संबंधों का विविधीकरण अहम होगा। उन्होंने मिडिल ईस्ट, एशिया पैसिफिक और यूनाइटेड किंगडम के साथ व्यापार समझौतों को भविष्य की जरूरत बताया। घरेलू स्तर पर श्रम सुधार और जीएसटी जैसे कदमों से उपभोक्ता वस्तुओं पर कर बोझ कम हुआ है, जिससे मांग को बल मिला है।
वैश्विक अनिश्चितता में भारत की स्थिरता
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता, बिखराव और तेज तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रही है, तब भारत स्थिरता और दीर्घकालिक अवसरों के बड़े बाजार के रूप में उभर रहा है। उनके अनुसार भारत का बड़ा बाजार, निरंतर सुधार और अनुकूल जनसांख्यिकी उसे अन्य अर्थव्यवस्थाओं से अलग बनाते हैं।
ग्रोथ हब के रूप में भारत का संदेश
इस गोलमेज बैठक में बैंकिंग, बीमा, टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य, केमिकल्स, कंज्यूमर गुड्स, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों के वैश्विक प्रतिनिधि शामिल हुए। दावोस से भारत का संदेश साफ रहा—भारत केवल उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि आने वाले दशक का प्रमुख ग्रोथ हब बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
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