अमेरिका से भारी मुआवजे की मांग: जानिए क्यों अब भी जी का जंजाल बना हुआ है होर्मुज का मुद्दा

अमेरिका से भारी मुआवजे की मांग: जानिए क्यों अब भी जी का जंजाल बना हुआ है होर्मुज का मुद्दा

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक व्यापार के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में शुमार होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव अभी पूरी तरह थमता नजर नहीं आ रहा है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया है कि केवल ओमान के साथ हुए समझौते के आधार पर इस नौसैनिक मार्ग को पूरी तरह से दोबारा खोलना संभव नहीं है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि इस मार्ग का पूरी तरह खुलना कई अन्य शर्तों और महत्वपूर्ण बिंदुओं पर निर्भर करता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अस्थायी समुद्री मार्ग को लेकर चल रही बातचीत अब अपने अंतिम नतीजे के बेहद करीब पहुंच चुकी है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अतिरिक्त शर्तें पूरी होने के बाद ही इसे अमलीजामा पहनाया जाएगा।

ओमान समझौते से पूरी तरह नहीं खुलेगा रास्ता

ईरान की आधिकारिक 'आईआरआईबी' समाचार एजेंसी के साथ बातचीत करते हुए अब्बास अराघची ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ओमान के साथ हुई हालिया कार्रवाई सीधे तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से फिर से खोलने का संकेत नहीं देती है।

उन्होंने आगे विस्तार से बताते हुए कहा कि इस नौसैनिक मार्ग का दोबारा सुचारू होना 'अन्य शर्तों' और इसके साथ ही 'संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा समझौता ज्ञापन के उल्लंघन के लिए मुआवजे' की अदायगी पर पूरी तरह निर्भर करेगा। ईरानी पक्ष का साफ मानना है कि जब तक अमेरिका द्वारा किए गए उल्लंघनों की भरपाई और तय शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक इस रास्ते को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है।

60 प्रतिशत तक पहुंच गया था यातायात का स्तर

अल जज़ीरा की रिपोर्ट्स के हवाले से अराघची ने जानकारी दी कि तेहरान वर्तमान में जून महीने में हुए युद्धविराम के दौरान तय किए गए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन यानी एमओयू के खंड 5 का गंभीरता से कार्यान्वयन कर रहा है।

इस प्रावधान के अनुसार, होर्मुज जलमार्ग में समुद्री यातायात और जहाजों की आवाजाही एक महीने के भीतर पूरी तरह सामान्य हो जाने की उम्मीद जताई गई थी। अराघची ने यह भी दावा किया कि तेहरान ने बेहद कम समय यानी महज "दो सप्ताह के भीतर 60 प्रतिशत सामान्य स्थिति" हासिल करने में अहम मदद की थी। हालांकि, उनका आरोप है कि तेहरान द्वारा पेंटागन को कड़ी चेतावनी दिए जाने के बावजूद अमेरिका ने इस जलमार्ग के माध्यम से नए रास्ते बनाने की लगातार कोशिशें जारी रखीं।