ट्रंप का अल्टीमेटम: 'हाथ भी लगाया तो ईरानी फंड से वसूलेंगे पाई-पाई', ईरान ने भी तरेरी आंखें!

ट्रंप का अल्टीमेटम: 'हाथ भी लगाया तो ईरानी फंड से वसूलेंगे पाई-पाई', ईरान ने भी तरेरी आंखें!

वैश्विक राजनीति में एक बार फिर से भारी गर्माहट देखने को मिल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद कड़े शब्दों में सीधी चेतावनी दे डाली है। ट्रंप ने साफ किया है कि अगर अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर चल रहे अमेरिकी या उनके सहयोगी देशों के जहाजों को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाया गया या उन्हें हाथ भी लगाया गया, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। इस नुकसान की पाई-पाई की वसूली सीधे तौर पर फ्रीज किए गए ईरानी फंड से की जाएगी। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर पहले से ही तनाव की स्थिति बनी हुई है। अमेरिका के इस सख्त रुख ने दुनिया भर के नीति निर्माताओं और बाजार विशेषज्ञों को चौकन्ना कर दिया है।

अकाउंट होगा सीज: अमेरिका ऐसे वसूलेगा नुकसान का हर्जाना

ट्रंप की इस धमकी के पीछे एक सोची-समझी आर्थिक रणनीति दिखाई दे रही है। अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों के पास पहले से ही ईरान के अरबों डॉलर के फंड विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बैंकों में फ्रीज (जब्त) पड़े हैं। ट्रंप का इशारा साफ है कि यदि ईरान समर्थित गुटों या खुद ईरानी सेना ने समुद्र में किसी भी जहाज को निशाना बनाया, तो अमेरिका बिना किसी सैन्य युद्ध के सीधे उन फ्रीज किए गए पैसों से अपने नुकसान का हर्जाना निकाल लेगा। इस तरह की वित्तीय नाकेबंदी और सीधी आर्थिक चोट से ईरान को बैकफुट पर लाने की कोशिश की जा रही है, जिससे बिना गोली चलाए भी ईरान पर बड़ा दबाव बनाया जा सके।

ईरान का पलटवार: धमकियों के आगे न झुकने का ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति के इस आक्रामक बयान के बाद ईरान ने भी अपनी आंखें तरेर ली हैं। तेहरान की ओर से आए बयानों में अमेरिका को स्पष्ट शब्दों में आगाह किया गया है कि वे किसी भी तरह की गीदड़भभकी से डरने वाले नहीं हैं। ईरान का कहना है कि उनकी सेना अपनी संप्रभुता और समुद्री सीमाओं की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है। ईरान ने अमेरिकी रुख को अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताते हुए कहा है कि अगर उन पर किसी भी तरह की आर्थिक या सैन्य कार्रवाई थोपी गई, तो इसका करारा जवाब दिया जाएगा। ईरान के इस पलटवार से क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति और गहरी होती जा रही है।

वैश्विक व्यापार और कच्चे तेल के बाजारों पर मंडराया संकट

दोनों शक्तिशाली देशों के बीच जुबानी जंग तेज होने से ग्लोबल मार्केट में हलचल मच गई है। चूंकि यह पूरा विवाद उस समुद्री रास्ते (स्ट्रेट ऑफ हारमुज) के आसपास केंद्रित है जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात-निर्यात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका बढ़ गई है। अगर यह तनाव हकीकत में किसी सैन्य टकराव या जहाजों को रोकने के सिलसिले में बदलता है, तो भारत सहित कई एशियाई और यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ेगा। एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि आने वाले दिन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से बेहद नाजुक होने वाले हैं।

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