भारत के इतिहास में पहली बार, तस्‍करी कर लाया गया नन्‍हा ओरंगउटान वापस इंडोनेशिया पहुंचा

भारत के इतिहास में पहली बार, तस्‍करी कर लाया गया नन्‍हा ओरंगउटान वापस इंडोनेशिया पहुंचा

भारतीय वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण इतिहास में एक ऐसा अनूठा और बेहद सराहनीय वाकया दर्ज हुआ है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वन्यजीवों की अवैध तस्करी और उनके काले कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों के बीच भारत से एक बहुत ही सकारात्मक और प्रेरणादायक खबर सामने आ रही है। देश के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब वन्यजीव तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया गया एक बेहद दुर्लभ और नन्हा ओरंगउटान (Orangutan) पूरी तरह सुरक्षित रूप से उसके मूल निवास स्थान यानी इंडोनेशिया वापस भेज दिया गया है। वन्यजीव तस्करों द्वारा इस बेजुबान और मासूम जीव को गैरकानूनी तरीके से भारत की सीमा में लाया गया था, लेकिन भारतीय वन्यजीव अधिकारियों, पुलिस और अंतरराष्ट्रीय पशु संरक्षण संगठनों की मुस्तैदी के चलते इस सनसनीखेज तस्करी का पर्दाफाश हुआ और अब इस नन्हे जीव की उसके घर वापसी ने सभी पशु प्रेमियों के चेहरों पर खुशी ला दी है।

कैसे हुई थी इस दुर्लभ ओरंगउटान की भारत में तस्करी और पर्दाफाश?

वन्यजीवों की तस्करी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह अक्सर दुर्लभ प्रजाति के बंदरों, पक्षियों और अन्य जीवों को अवैध मुनाफे के लिए एक देश से दूसरे देश में तस्करी करके ले जाते हैं। इसी कड़ी में कुछ समय पहले तस्करों ने इस नन्हे ओरंगउटान को इंडोनेशिया के जंगलों से चुराकर या पकड़कर भारत के किसी रास्ते से देश के भीतर दाखिल करने की कोशिश की थी। खुफिया एजेंसियों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं को जब इस बात की भनक लगी कि देश के भीतर किसी अवैध ठिकाने पर एक विदेशी प्रजाति का ओरंगउटान छुपाकर रखा गया है, तो तुरंत एक विशेष अभियान चलाया गया। स्थानीय पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर उस गुप्त ठिकाने से इस नन्हे और डरे हुए ओरंगउटान को अपने कब्जे में ले लिया। उस वक्त वह काफी डरा हुआ था और उसकी सेहत भी ठीक नहीं थी, जिसके बाद उसे तुरंत एक विशेष पशु चिकित्सा केंद्र में रखकर उसकी देखभाल शुरू की गई।

भारत और इंडोनेशिया के बीच उच्च स्तरीय कूटनीतिक और वन्यजीव समन्वय

किसी विदेशी वन्यजीव को उसके मूल देश में सुरक्षित वापस भेजना कोई आसान काम नहीं होता है। इसके लिए दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चैनलों, दूतावासों, पर्यावरण मंत्रालयों और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (Central Zoo Authority) के बीच महीनों तक पत्राचार और कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करना पड़ता है। भारत सरकार और इंडोनेशियाई दूतावास ने इस मामले में अद्भुत तत्परता दिखाते हुए एक संयुक्त कार्ययोजना तैयार की। यह सुनिश्चित किया गया कि इस नन्हे ओरंगउटान को विमान के जरिए विशेष कार्गो में तमाम मेडिकल सुविधाओं और एक एक्सपर्ट वेटरनरी टीम की निगरानी में जकार्ता (इंडोनेशिया) पहुंचाया जाए। भारतीय वन्यजीव इतिहास में यह पहला ऐसा मौका है जब किसी जप्त किए गए विदेशी प्राइमेट (Primate) को पूरी कानूनी प्रक्रिया और सम्मान के साथ उसके अपने प्राकृतिक आवास और रिहैबिलिटेशन सेंटर में वापस रिहा किया गया है।

वन्यजीव तस्करों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खिलाफ एक कड़ा संदेश

पर्यावरणविदों और वन्यजीव संरक्षण कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई से वन्यजीवों की तस्करी करने वाले गिरोहों को एक बहुत कड़ा संदेश गया है। भारत जैसे विशाल देश में तस्कर अक्सर यह सोचते हैं कि वे आसानी से किसी भी वन्यजीव को छुपाकर यहां ला सकते हैं, लेकिन इस घटना ने साबित कर दिया है कि भारतीय एजेंसियां अब वन्यजीव अपराधों को लेकर कितनी ज्यादा सतर्क हो चुकी हैं। ओरंगउटान मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्वी एशिया के सुमात्रा और बोर्नियो द्वीपों के घने वर्षावनों में पाए जाते हैं और इनकी प्रजाति लुप्तप्राय (Endangered) की श्रेणी में आती है। ऐसे में इस नन्हे जीव की सुरक्षित वापसी न केवल भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई है, बल्कि इसने यह भी बता दिया है कि इंसानियत और जीव दया की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती है।

तस्करों के चंगुल से निकलकर अब अपने प्राकृतिक आवास में खिलेगी नन्हे ओरंगउटान की जिंदगी

जब इस नन्हे ओरंगउटान को इंडोनेशिया के उस विशेष अभ्यारण्य और पुनर्वास केंद्र में छोड़ा गया, जहां उसके जैसे अन्य ओरंगउटान प्राकृतिक माहौल में रहते हैं, तो वहां के विशेषज्ञों ने राहत की सांस ली। भारत से लौटने के बाद अब वह धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है और वहां के जंगलों के वातावरण में ढलने की कोशिश कर रहा है। सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया पर इस घटना की चर्चा काफी जोर-शोर से हो रही है, और लोग भारतीय अधिकारियों की इस संवेदनशीलता और मानवता की भूरी-भूरी प्रशंसा कर रहे हैं। यह घटना इस बात की मिसाल है कि जब पूरा सिस्टम किसी बेजुबान की जान बचाने के लिए एकजुट हो जाता है, तो असंभव लगने वाले काम भी बहुत आसानी से संभव हो जाते हैं।