संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की दावेदारी: विदेश मंत्री जयशंकर ने पेश किया 'SHANTI' विजन

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की दावेदारी: विदेश मंत्री जयशंकर ने पेश किया 'SHANTI' विजन

भारत ने एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के केंद्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए अस्थायी सदस्यता के लिए अपनी आधिकारिक दावेदारी पेश कर दी है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक उच्च-स्तरीय सत्र के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की तरफ से दावेदारी का औपचारिक ऐलान किया। इस मौके पर उन्होंने भारत के भावी एजेंडे को 'SHANTI' (शांति) विजन के रूप में पेश किया है, जो न केवल भारत के संकल्पों को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक शांति और सुरक्षा के प्रति देश की प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट करता है।

क्या है विदेश मंत्री का 'SHANTI' विजन?

विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने संबोधन में 'SHANTI' के प्रत्येक अक्षर को भारत की वैश्विक प्राथमिकताओं और सुरक्षा परिषद के एजेंडे के साथ जोड़ते हुए एक नया आयाम दिया है:

  • S - Security (सुरक्षा): आतंकवाद और सीमा पार से होने वाली हिंसा के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति।

  • H - Harmony (सामंजस्य): विभिन्न देशों और संस्कृतियों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना।

  • A - Accountability (जवाबदेही): अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संधियों के प्रति सभी सदस्य देशों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करना।

  • N - Neutrality (तटस्थता): संघर्षों के समाधान के लिए निष्पक्ष और न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाना।

  • T - Transparency (पारदर्शिता): बहुपक्षीय संस्थाओं की कार्यप्रणाली में अधिक खुलापन और लोकतांत्रिक पारदर्शिता।

  • I - Inclusion (समावेशन): 'ग्लोबल साउथ' (Global South) और विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक निर्णय लेने वाली मेज तक पहुंचाना।

सुरक्षा परिषद में सुधारों की मांग पर भारत का जोर

जयशंकर ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष बल दिया कि 21वीं सदी की दुनिया के लिए 1945 के ढांचे वाली सुरक्षा परिषद अब अप्रासंगिक होती जा रही है। उन्होंने कहा कि जब तक UNSC में उचित सुधार (UNSC Reforms) नहीं किए जाते और इसमें भारत जैसे प्रमुख देशों को स्थायी/अस्थायी सदस्यता के माध्यम से उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता, तब तक यह संस्था विश्व की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में अक्षम बनी रहेगी।

भारत ने स्पष्ट किया है कि उसकी दावेदारी केवल एक सीट की नहीं, बल्कि उन करोड़ों लोगों की आवाज बनने की है जो आज भी वैश्विक शांति के प्रति अनिश्चितता के दौर में जी रहे हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है भारत की यह दावेदारी?

भारत की यह दावेदारी कई मायनों में ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण मानी जा रही है:

  1. ग्लोबल साउथ की आवाज: भारत खुद को विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ के एक प्रमुख नेता के रूप में पेश कर रहा है। सुरक्षा परिषद में भारत की उपस्थिति इन देशों के हितों की रक्षा के लिए एक ढाल का काम करेगी।

  2. आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक मोर्चा: भारत पिछले कई वर्षों से सुरक्षा परिषद में आतंकवाद के वित्तपोषण और प्रसार पर रोक लगाने के लिए कड़ा रुख अपनाता रहा है। सदस्यता मिलने पर भारत इस मुद्दे को और मजबूती से उठा सकेगा।

  3. संतुलनकारी शक्ति: मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों के बीच, भारत खुद को एक ऐसी तटस्थ और तर्कसंगत शक्ति के रूप में देखता है जो विपरीत ध्रुवों के बीच एक सेतु (Bridge) का कार्य कर सकती है।

अब सबकी निगाहें संयुक्त राष्ट्र महासभा के आगामी सत्र पर हैं, जहां सदस्य देशों द्वारा भारत की दावेदारी का समर्थन किया जाएगा। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत को विभिन्न महाद्वीपों के अधिकांश देशों का सकारात्मक संकेत मिल रहा है, जिससे भारत की जीत की प्रबल संभावना जताई जा रही है।

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