ईरान की एविएशन इंडस्ट्री पर मंडराया सबसे बड़ा संकट, अमेरिका का खौफनाक प्लान तैयार
वैश्विक भू-राजनीति के अखाड़े में एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का पारा सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। मध्य पूर्व के सुलगते हालात के बीच अब अमेरिका ने ईरान की रीढ़ तोड़ने के लिए एक बेहद खतरनाक और व्यापक रणनीतिक योजना तैयार कर ली है। इस बार अमेरिकी प्रशासन का सीधा निशाना ईरान की कमर्शियल और सरकारी एयरलाइंस बनी हैं। अमेरिका ने ईरान की विमानन कंपनियों पर न केवल पूर्ण प्रतिबंध लगाने का मन बना लिया है, बल्कि दुनिया के उन तमाम देशों, एयरलाइंस और कंपनियों को भी चेतावनी दी है जो ईरान की किसी भी प्रकार से मदद या स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति करेंगे। अमेरिकी प्रशासन द्वारा उठाए जाने वाले इस कड़े कदम से वैश्विक एविएशन सेक्टर में खलबली मच गई है। आइए जानते हैं कि अमेरिका के इस नए और आक्रामक प्लान के पीछे की असल वजह क्या है और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या बड़े भू-राजनीतिक समीकरण बनने जा रहे हैं।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और नीति निर्माताओं का लंबे समय से यह दावा रहा है कि ईरान अपनी कमर्शियल एयरलाइंस का इस्तेमाल यात्री सेवाओं के साथ-साथ गोपनीय सैन्य गतिविधियों, हथियार परिवहन और प्रॉक्सी संगठनों को रसद पहुंचाने के लिए करता है। वाशिंगटन का मानना है कि ईरान के विमानों का उपयोग मध्य पूर्व के विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों में हथियारों और लड़ाकों की आवाजाही के लिए किया जाता है। इसी आरोप के आधार पर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग और विदेश मंत्रालय ने ईरान के पूरे एविएशन नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने का खाका तैयार किया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जब तक ईरान अपनी क्षेत्रीय आक्रामकता और गुप्त सैन्य गतिविधियों पर लगाम नहीं लगाता, तब तक उसके आर्थिक और परिवहन तंत्र पर चौतरफा शिकंजा कसा जाना बेहद जरूरी है।
इस अमेरिकी प्लान की सबसे डरावनी और आक्रामक बात इसके द्वितीयक प्रतिबंध (Secondary Sanctions) हैं। अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल ईरान की एयरलाइंस ही नहीं, बल्कि दुनिया का कोई भी देश, कंपनी, मेंटेनेंस फर्म या ईंधन आपूर्तिकर्ता यदि ईरानी विमानों को तकनीकी सहायता, स्पेयर पार्ट्स, ग्राउंड हैंडलिंग या फ्यूल उपलब्ध कराएगा, उसे भी सीधे तौर पर अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। इसका सीधा मतलब यह है कि दुनिया की बड़ी-बड़ी एविएशन कंपनियां अब ईरान के साथ किसी भी तरह का व्यावसायिक रिश्ता रखने से तौबा कर लेंगी क्योंकि एक छोटी सी गलती उन्हें अमेरिकी बाजार और वित्तीय प्रणाली से बाहर करवा सकती है। इस चेतावनी के बाद कई अंतरराष्ट्रीय ऑपरेटरों ने ईरान के लिए अपनी उड़ानों पर पुनर्विचार करना शुरू कर दिया है।
अमेरिका के इस चौतरफा आर्थिक और तकनीकी शिकंजे का सबसे गंभीर और मानवीय असर आम ईरानी नागरिकों पर पड़ने वाला है। ईरान की अधिकांश कमर्शियल एयरलाइंस पहले से ही पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण पुराने हो चुके जहाजों और स्पेयर पार्ट्स की भारी कमी से जूझ रही हैं। विमानों के रखरखाव के लिए जरूरी कलपुर्जे न मिलने के कारण आए दिन उड़ानें रद्द होती रहती हैं या तकनीकी खराबी के हादसे सामने आते हैं। अब जब अमेरिका ने उन देशों पर भी एक्शन लेने की तैयारी कर ली है जो परोक्ष रूप से ईरान को मदद देते थे, तो स्थिति और अधिक भयावह हो जाएगी। ईरान के भीतर हवाई यात्रा पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच सकती है, जिससे व्यापार, पर्यटन और सामान्य नागरिकों की आवाजाही पर गहरा संकट छा जाएगा।
अमेरिका का यह ताजा कदम इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि महाशक्तियां अब पारंपरिक युद्धों के साथ-साथ आर्थिक और तकनीकी प्रतिबंधों को अपने सबसे बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। ईरान की एयरलाइंस पर लगने वाले इन नए और कड़े प्रतिबंधों से मध्य पूर्व की भू-राजनीति में तनाव और अधिक गहरा जाएगा। एक तरफ जहां अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगी ईरान को आर्थिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग करना चाहते हैं, वहीं ईरान के सहयोगी देश इस दबाव का मुकाबला करने के लिए वैकल्पिक और गुप्त व्यापारिक मार्ग तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले हफ्तों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका का यह आक्रामक प्लान ईरान को अपनी नीतियां बदलने पर मजबूर कर पाता है या फिर मध्य पूर्व का संकट एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच जाता है।