IWT: सिंधु संधि पर तनातनी के बीच राजनाथ सिंह और इशाक डार होंगे आमने-सामने

IWT: सिंधु संधि पर तनातनी के बीच राजनाथ सिंह और इशाक डार होंगे आमने-सामने

दक्षिण एशिया के दो प्रमुख देशों, भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने संबंधों में आई खटास अब एक नए मोड़ पर पहुंच चुकी है। 1960 की ऐतिहासिक सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) की समीक्षा, इसमें बदलाव और पानी के न्यायसंगत बंटवारे को लेकर जारी कूटनीतिक जुबानी जंग के बीच शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बहुप्रतीक्षित बैठक वैश्विक मंच पर एक नए तनाव का केंद्र बनती दिख रही है। इस अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में भारत का नेतृत्व कर रहे देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री सह विदेश मंत्री इशाक डार का एक-दूसरे से सामना होना तय माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि जल सुरक्षा और क्षेत्रीय कूटनीति पर दोनों देशों के कड़े रुख के कारण इस मंच पर भारी वैचारिक टकराव देखने को मिल सकता है।

सिंधु जल संधि पर भारत का कड़ा रुख और पाकिस्तान की नई चिंताएं

भारत सरकार ने सिंधु जल संधि के नियमों में संशोधन की मांग को लेकर सख्त रवैया अपनाया हुआ है। भारत का स्पष्ट मानना है कि परिस्थितियों, जनसांख्यिकीय बदलावों और पर्यावरण तथा जलवायु परिवर्तन की नई चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इस संधि में व्यापक बदलाव आवश्यक हैं। वहीं, भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर में निष्पादित की जा रही विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं पर पाकिस्तान लगातार आपत्तियां दर्ज कराता रहा है। हालांकि, भारत ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि ये सभी निर्माण और परियोजनाएं संधि की सीमाओं के पूर्णतः भीतर हैं। पाकिस्तान की आंतरिक जल संकट की स्थिति और कृषि पर पड़ रहे असर के चलते इस्लामाबाद में चिंता की लहर है, जिससे इस द्विपक्षीय विवाद ने अधिक गंभीर रूप धारण कर लिया है।

SCO सम्मेलन के मंच पर क्या होगी रणनीति और टकराव का बिंदु?

SCO सम्मेलन एक बहुपक्षीय मंच है जिसका प्राथमिक उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, आतंकवाद विरोधी सहयोग और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना है। फिर भी, जब भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधि एक ही टेबल पर मौजूद होते हैं, तो द्विपक्षीय तनाव की परछाई स्वाभाविक रूप से पूरे एजेंडे पर दिखाई देने लगती है। भारत का मुख्य ध्यान आतंकवाद के खिलाफ सख्त क्षेत्रीय कार्रवाई और अवसंरचनात्मक विकास पर केंद्रित रहने की संभावना है, जबकि पाकिस्तान सिंधु जल संधि के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहानुभूति हासिल करने का प्रयास कर सकता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कड़े कूटनीतिक रुख और भारत की स्पष्ट रणनीतिक स्वायत्तता नीति को देखते हुए यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों पक्ष किसी प्रकार के अनौपचारिक संवाद में शामिल होते हैं या केवल औपचारिक बहुपक्षीय बैठकों तक ही सीमित रहते हैं।

क्या जल कूटनीति और क्षेत्रीय भू-राजनीति में बदलेगा समीकरण?

विश्व भर के राजनीतिक विशेषज्ञों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या SCO का यह मंच भारत और पाकिस्तान के बीच पानी को लेकर बनी गतिरोध की स्थिति को पिघलाने में मदद करेगा या फिर यह दरार और चौड़ी होगी। भारत ने हेग स्थित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन की गैर-सहमति वाली कार्यवाहियों को खारिज करते हुए द्विपक्षीय तंत्र के माध्यम से ही समाधान पर जोर दिया है। इस पृष्ठभूमि में राजनाथ सिंह का स्पष्ट संदेश और इशाक डार की कूटनीतिक प्रतिक्रिया न केवल दक्षिण एशियाई राजनीति बल्कि वैश्विक जल-कूटनीति के भविष्य की दिशा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।