OPEC+ का बड़ा फैसला: नवंबर में कच्चे तेल के उत्पादन में बदलाव नहीं, जानिए भारत पर क्या होगा असर

OPEC+ का बड़ा फैसला: नवंबर में कच्चे तेल के उत्पादन में बदलाव नहीं, जानिए भारत पर क्या होगा असर

ग्लोबल एनर्जी मार्केट में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन और उसके सहयोगियों (OPEC+) ने रविवार को हुई अपनी महत्वपूर्ण बैठक में एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। रूस और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले इस 22 सदस्यीय समूह ने स्पष्ट कर दिया है कि नवंबर महीने के लिए कच्चे तेल के उत्पादन लक्ष्यों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, ग्रुप ने उत्पादन कोटा को यथावत रखने की पुष्टि की है, जिसका सीधा असर भारत जैसे बड़े आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा।

विश्व स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को संतुलित बनाए रखने के मकसद से लिया गया यह फैसला भारत के लिहाज से काफी राहत भरा माना जा रहा है। भारत अपनी घरेलू कच्चे तेल की कुल खपत का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात करता है। उत्पादन लक्ष्यों में किसी अप्रत्याशित कटौती के न होने से वैश्विक बाजार में सप्लाई नियंत्रित रहेगी और कीमतों में अचानक उछाल आने का जोखिम टल गया है। इससे भारत के आयात बिल पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा, विदेशी मुद्रा भंडार स्थिर रहेगा और घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव की संभावना बेहद कम हो जाएगी, जिससे देश की खुदरा महंगाई दर और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने में खासी मदद मिलेगी।

यह फैसला ऐसे नाजुक मोड़ पर आया है जब मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है और दुनिया के सबसे प्रमुख तेल पारगमन मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के जरिए कच्चे तेल के निर्यात में संभावित रुकावटों का खतरा मंडरा रहा है। बाजार विशेषज्ञों की नजरें इस बात पर टिकी थीं कि क्या यह तेल उत्पादक समूह युद्ध और आपूर्ति संकट की आशंकाओं के बीच अपने उत्पादन में कोई फेरबदल करेगा, लेकिन ग्रुप ने बाजार का विस्तृत आकलन करने के बाद फिलहाल वर्तमान स्थिति को ही बनाए रखने का विकल्प चुना।

उल्लेखनीय है कि उत्पादन को लेकर यह स्थिरता लगातार दूसरे महीने देखने को मिली है। इससे पूर्व 6 सितंबर को आयोजित वर्चुअल बैठक में भी सात प्रमुख सदस्य देशों—सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने अक्टूबर के लिए उत्पादन लक्ष्यों में कोई भी बदलाव न करने पर सहमति जताई थी। इन देशों ने पूर्व में अप्रैल और नवंबर 2023 में स्वेच्छा से अतिरिक्त उत्पादन समायोजन की घोषणा की थी और फिलहाल ये सदस्य तेल बाजार की वैश्विक मांग और आपूर्ति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।