सऊदी अरामको और एयरपोर्ट पर भीषण ड्रोन हमला, भारतीय समेत कई हताहत; अमेरिका ने खाली कराया दूतावास
सऊदी अरब के प्रमुख ऊर्जा और नागरिक ठिकानों पर हुए संदिग्ध हूथी ड्रोन हमलों ने खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा संकट को गहरा कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, देश की सेना ने बुधवार सुबह सऊदी अरामको की शायबाह तेल रिफाइनरी को निशाना बनाने की फिराक में आए एक ड्रोन को हवा में ही मार गिराया।
हालांकि, इंटरसेप्शन के बाद नीचे गिरे मलबे की चपेट में आने से फैसिलिटी के बाहर खड़ी एक कॉन्ट्रैक्टर गाड़ी में भीषण आग लग गई। इस हादसे में फिलीपींस और नेपाल के दो कर्मचारियों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, मलबे की चपेट में आने से एक भारतीय और एक पाकिस्तानी नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। गनीमत यह रही कि इस घटना से रिफाइनरी के मुख्य संचालन और उत्पादन पर कोई सीधा असर नहीं पड़ा है। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और घायलों के त्वरित इलाज के निर्देश दिए हैं।
ऊर्जा संयंत्र के अलावा हमलावरों ने नागरिक उड्डयन को भी निशाना बनाया। दम्मम स्थित किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए एक अन्य हमले में एक व्यक्ति की जान चली गई और आठ अन्य लोग घायल हो गए। सऊदी जनरल अथॉरिटी ऑफ सिविल एविएशन के अनुसार, एयरपोर्ट परिसर को काफी नुकसान पहुंचा है और प्रभावित यात्रियों व घायलों को आपात सहायता दी जा रही है। लगातार बुनियादी ढांचे, एयरपोर्ट्स और तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने से सुरक्षा तंत्र बेहद सतर्क है।
तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने गैर-ज़रूरी राजनयिकों और उनके परिजनों को तत्काल प्रभाव से सऊदी अरब छोड़ने का आदेश जारी कर दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि नागरिकों और राजनयिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान समर्थित हूथी विद्रोही लगातार नागरिक ठिकानों और परिवहन मार्गों को खतरे में डाल रहे हैं। इस संकट ने सऊदी-अमेरिका कूटनीतिक तालमेल पर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि रियाद की सैन्य अपीलों के बावजूद अमेरिकी प्रशासन ने सीधे हस्तक्षेप से दूरी बनाए रखी है, जिसके बाद सऊदी अरब अब क्षेत्र में अन्य साझेदारों के साथ रक्षा सहयोग मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।