न्यूयॉर्क के गवर्नर का 'हिजाब प्रेम' और 9/11 से पहले मचा बवाल
न्यूयार्क में इन दिनों एक अजीब सियासी भूचाल आया हुआ है, जहाँ गवर्नर के एक फैसले ने जनता की नींद उड़ा दी है। अमेरिका की वित्तीय राजधानी कहे जाने वाले न्यूयॉर्क शहर में इन दिनों हिजाब पहनने के मामले को लेकर राजनीति गरमा गई है। राज्य की गवर्नर कैथी होचुल की ओर से उठाए गए एक हालिया कदम ने स्थानीय नागरिकों और प्रवासियों के बीच तीखी बहस छेड़ दी है। 9/11 की दर्दनाक बरसी से ठीक पहले इस तरह के विवाद का सामने आना लोगों के भीतर पुराने जख्मों को कुरेद रहा है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। आम जनता का कहना है कि एक संवेदनशील शहर में इस तरह की नीतियों को बढ़ावा देना सुरक्षा और सांस्कृतिक संतुलन के लिहाज से सही नहीं है। आलोचकों का यहां तक कहना है कि प्रशासनिक तंत्र बाहरी दबाव और तुष्टिकरण की राजनीति के आगे झुक रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर जनता में भारी बेचैनी देखी जा रही है।
जनता का फूटा गुस्सा: बोले- 'तीसरी दुनिया के आगे टेके घुटने'
इस पूरे विवाद के बीच न्यूयॉर्क की सड़कों से लेकर ऑनलाइन मंचों तक एक ही चर्चा है कि क्या प्रशासन अपनी ही सुरक्षा और मूल लोकतांत्रिक मूल्यों से समझौता कर रहा है। गुस्साए नागरिकों का कहना है कि गवर्नर ने बिना सोचे-समझे ऐसा फैसला लिया है जो शहर के सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर सकता है। सोशल मीडिया पर #NewYorkGovernor और #HijabControversy जैसे ट्रेंड्स के जरिए लोग अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जिसमें कई नागरिकों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन ने तीसरी दुनिया के दबाव और प्राथमिकताओं के आगे अपने घुटने टेक दिए हैं।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब न्यूयॉर्क और पूरा अमेरिका 9/11 के उन काले दिनों की बरसी मनाने की तैयारी कर रहा है, जब आतंकवाद ने इस देश को झकझोर कर रख दिया था। इस संवेदनशील मौके पर इस तरह के सांस्कृतिक और राजनीतिक विवाद का तूल पकड़ना सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस मामले को समय रहते राजनीतिक सूझबूझ से नहीं संभाला गया, तो आने वाले चुनावों में गवर्नर और उनकी पार्टी को इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।