FATF के डर से पाकिस्तान ने बदला सुर! मसूद अजहर की रेड बुक में एंट्री, लेकिन कहानी में बड़ा झोल

FATF के डर से पाकिस्तान ने बदला सुर! मसूद अजहर की रेड बुक में एंट्री, लेकिन कहानी में बड़ा झोल

इस्लामाबाद से एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की आंखों में धूल झोंकने की पुरानी साजिश सामने आई है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की अक्टूबर में प्रस्तावित अहम बैठक से ठीक पहले पाकिस्तान सरकार ने अपने पुराने पैंतरे पर चलते हुए जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर का नाम फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) की मोस्ट वांटेड आतंकियों की 'रेड बुक' में दर्ज कर दिया है।

इसके साथ ही मसूद अजहर की गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना पर 70 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की गई है। वैश्विक मंचों पर ब्लैकलिस्ट या कड़ी निगरानी से बचने के लिए इस्लामाबाद पहले भी ऐसे दिखावे करता रहा है, जिसे रक्षा विशेषज्ञ महज एक औपचारिकता और कूटनीतिक दिखावा मान रहे हैं।

ऑपरेशन सिंदूर में मारे गए थे 9 परिजन, अब पाक बोला- देश में नहीं है मसूद

पाकिस्तान का यह कदम पूरी तरह विरोधाभासों से भरा है। पिछले वर्ष जब भारतीय सेना ने सीमा पार 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू कर पाकिस्तान और गुलाम कश्मीर (PoK) के भीतर 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे, तब खुद मसूद अजहर ने एक ऑडियो बयान जारी करके माना था कि उस सैन्य कार्रवाई में उसके परिवार के 9 सदस्य मारे गए थे। उस समय अपनी मौजूदगी साबित करने के बावजूद अब पाकिस्तान सरकार आधिकारिक तौर पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह राग अलाप रही है कि मसूद अजहर उसके मुल्क में मौजूद ही नहीं है।

इनाम 50 से बढ़ाकर 70 लाख, सिंध के नवाबशाह में छिपे होने का इनपुट

मसूद अजहर को लेकर इस्लामाबाद का रवैया लगातार टालमटोल वाला रहा है। वर्ष 2021 में भी पाकिस्तान ने दावा किया था कि वह देश छोड़कर अफगानिस्तान भाग चुका है। उसी दौरान एफआईए ने उस पर 50 लाख रुपये का इनाम रखा था। अब पांच साल बाद इस राशि में 20 लाख की बढ़ोतरी कर इसे 70 लाख रुपये किया गया है। दूसरी ओर, भारतीय खुफिया एजेंसियों के सूत्रों द्वारा पिछले छह महीनों में किए गए तकनीकी विश्लेषण और सर्विलांस इनपुट्स से यह साफ हुआ है कि जैश सरगना कहीं बाहर नहीं, बल्कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत स्थित नवाबशाह शहर के एक सुरक्षित ठिकाने में छिपा हुआ है।

एफआईए की रेड बुक में 26/11 के 19 मददगार, 17 की तस्वीरें जारी

एफआईए द्वारा जारी की गई आतंकियों की संशोधित रेड बुक में 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों में आतंकियों की मदद करने वाले 19 संदिग्धों के नाम भी शामिल किए गए हैं। इस फेहरिस्त में वे मददगार दर्ज हैं जिन्होंने हमलावरों को वित्तीय संसाधन मुहैया कराए और आतंकियों को भारतीय सीमा तक पहुंचाने वाली नौकाओं का संचालन संभाला था। इनमें से 17 आतंकियों की तस्वीरें और मुंबई हमलों में निभाई गई उनकी भूमिका का विवरण सार्वजनिक किया गया है।

दो आतंकियों की तस्वीर और लश्कर कनेक्शन छिपाने का नया खेल

हमेशा की तरह पाकिस्तान ने इस सूची में भी कुछ संदिग्धों को बचाने की चाल चली है। सूची में शामिल दो आरोपियों के मामले में एफआईए ने उनकी तस्वीरें, लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के साथ उनकी सीधी संबद्धता और मुंबई हमलों में निभाई गई विशिष्ट भूमिकाओं का पूरा ब्योरा हटा दिया है, और सिर्फ उनके नाम सूची में छोड़ दिए हैं। उदाहरण के तौर पर तुर्बत का रहने वाला मोहम्मद खान, जिसने आतंकियों को मुंबई भेजने के लिए 'अल-हुसैनी' नामक नाव का प्रबंध किया था, उसका नाम तो सूची में है, लेकिन उसकी तस्वीर और लश्कर से जुड़े होने के सभी सबूत रिकॉर्ड से मिटा दिए गए हैं।