7 दिन में होर्मुज खोलने का प्रस्ताव, ट्रंप ने ठुकराया तो अब क्या करेगा ईरान?

7 दिन में होर्मुज खोलने का प्रस्ताव, ट्रंप ने ठुकराया तो अब क्या करेगा ईरान?

पश्चिम एशिया में जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बेहद सनसनीखेज दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि आर्थिक रूप से पस्त हो चुका ईरान अब रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तत्काल फिर से खोलने के लिए छटपटा रहा है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ लफ्जों में कहा कि तेहरान ने इस बेहद अहम समुद्री रास्ते को बंद करके पूरी दुनिया के सामने मुश्किलें खड़ी करने की सोची थी, लेकिन अब वह खुद अपनी ही चाल का शिकार बनकर भारी आर्थिक बर्बादी झेल रहा है।

'वे बर्बाद हो रहे हैं': ट्रंप ने कसा तंज और बताई वजह

व्हाइट हाउस में मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने आक्रामक तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि ईरान अब इस जलमार्ग को तुरंत फिर से खोलना चाहता है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह बैठ चुकी है। ट्रंप के अनुसार, ईरान की आमदनी का सबसे बड़ा जरिया होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाला व्यापार ही था और अब वहीं से उनकी कमाई शून्य हो चुकी है। ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा कि ईरान ने खुद अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है और अपने ही बिछाए जाल में बुरी तरह फंस गया है।

सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी नाकाबंदी का दावा

राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि तेहरान की आक्रामकता के जवाब में वाशिंगटन ने सैन्य इतिहास की सबसे सख्त और विशाल नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर दी है। ट्रंप ने कहा कि ईरान दुनिया के लिए संकट खड़ा करना चाहता था, लेकिन अमेरिका ने वहां लोहे की ऐसी दीवार खड़ी कर दी जिसने केवल ईरान के जहाजों और तेल निर्यात का रास्ता पूरी तरह काट दिया, जबकि शेष दुनिया के जहाजों के लिए आवाजाही जारी रखी गई। ट्रंप के मुताबिक, इस सख्त घेराबंदी के चलते ईरान के पास अब विदेशी मुद्रा और राजस्व का भारी टोटा पड़ गया है।

क्या था संघर्ष का कारण और ईरान का 7 दिवसीय प्रस्ताव?

यह गतिरोध तब चरम पर पहुंचा जब फरवरी के आखिरी दौर में अमेरिका और इजराइल द्वारा इस्लामिक गणराज्य पर सैन्य हमले किए गए। इसके जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले और धमकियां देकर इस समुद्री गलियारे को लगभग बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति में हड़कंप मच गया था। बढ़ते वित्तीय दबाव के बीच ईरान ने हाल ही में अमेरिका के सामने एक प्रस्ताव रखा था। ईरान का कहना था कि यदि अमेरिका उसके बंदरगाहों से नौसैनिक नाकाबंदी हटा ले, ईरानी तेल बिक्री पर लगे सभी प्रतिबंध माफ करे और लेबनान समेत व्यापक युद्धविराम लागू करे, तो वह 7 दिनों के भीतर जलडमरूमध्य को खोल देगा और परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता भी बहाल कर देगा। हालांकि, ट्रंप ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया।

कूटनीति पर अड़ा ईरान, मध्यस्थों के औपचारिक जवाब का इंतजार

ट्रंप की दो टूक प्रतिक्रिया के बाद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दोहराया कि अमेरिका और इजराइल के साथ इस गंभीर सैन्य टकराव को सुलझाने का एकमात्र रास्ता केवल कूटनीति ही है। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अराघची ने कहा कि तेहरान ने ट्रंप के बयानों को सुना है, लेकिन अभी तक उन्हें किसी आधिकारिक मध्यस्थ के जरिए औपचारिक संदेश नहीं मिला है। विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि जलमार्ग को दोबारा खोलने के लिए ईरान की शर्तें अडिग हैं और कोई भी कदम इन शर्तों के पूरा होने पर ही निर्भर करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सार्थक बातचीत ही इस अंतरराष्ट्रीय गतिरोध का समाधान निकाल सकती है।