PoK में इतिहास का सबसे बड़ा आंदोलन: सोमवार को सीमा पार मचेगा भारी बवाल!
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इन दिनों हालात पूरी तरह बेकाबू हो चुके हैं। क्षेत्र के इतिहास का सबसे बड़ा और अभूतपूर्व राजनीतिक व सामाजिक उबाल इस समय चरम पर है। सोमवार का दिन इस पूरे अशांत क्षेत्र के लिए बेहद संवेदनशील और निर्णायक मोड़ लेकर आया है। महीनों से जारी हिंसक झड़पों, कड़े जन-विरोध और अनिश्चितता के साए में आज से PoK में विधानसभा चुनाव (Legislative Assembly Elections) का आगाज हो रहा है। मुजफ्फराबाद से लेकर मीरपुर तक फैली इस अशांति ने इस्लामाबाद की नींद उड़ा दी है।
संगीनों के साए में मतदान: पंजाब से बुलाए गए हजारों भारी हथियारबंद जवान
स्थानीय जनता के भीषण आक्रोश को देखते हुए पाकिस्तान सरकार बेहद खौफ में है। चुनाव को जबरन संपन्न कराने के लिए पूरे PoK को एक तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से 14,000 से अधिक अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को आनन-फानन में सीमा पार सुरक्षा की कमान संभालने के लिए भेजा गया है। जमीनी रिपोर्टों के मुताबिक, स्थिति इतनी ज्यादा तनावपूर्ण है कि तैनात किए गए सुरक्षा बलों के 30 प्रतिशत जवानों को आधुनिक और घातक हथियारों से लैस किया गया है, जबकि बाकी 70 प्रतिशत जवान दंगा नियंत्रण उपकरणों (Anti-riot gears) के साथ मोर्चा संभाले हुए हैं ताकि स्थानीय लोगों के किसी भी विद्रोह को बेरहमी से कुचला जा सके।
JKJAAC की हुंकार: शरणार्थी सीटों के आरक्षित कोटे पर छिड़ी आर-पार की जंग
इस ऐतिहासिक जनांदोलन के केंद्र में 'जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JKJAAC) है, जो पिछले दो महीनों से भी अधिक समय से सड़कों पर डटी हुई है। आंदोलनकारियों की सबसे बड़ी मांग PoK विधानसभा की कुल 53 सीटों में से उन 12 सीटों को पूरी तरह खत्म करने की है, जो शरणार्थियों (Refugees) के लिए आरक्षित हैं। आंदोलन चला रही कमेटी का साफ तर्क है कि ये शरणार्थी वास्तव में पाकिस्तान के पंजाब या सिंध जैसे अन्य हिस्सों में रहते हैं, इसलिए उन्हें PoK की स्थानीय राजनीति, सरकार और यहां के संसाधनों पर प्रभाव डालने का कोई नैतिक या संवैधानिक अधिकार नहीं होना चाहिए। 7 जून को वहां की सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन सीटों को वैध ठहराए जाने के बाद से भड़की हिंसा में अब तक 20 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं और सैकड़ों लोग जेलों में बंद हैं, क्योंकि सरकार ने इस संगठन पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत बैन लगा दिया है।
राजनीतिक घमासान और इमरान खान का बड़ा दांव: चुनाव का पूर्ण बहिष्कार
इस चुनावी ड्रामे में पाकिस्तान की मुख्यधारा की राजनीति भी पूरी तरह से उलझ गई है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी PTI (पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ) ने इन चुनावों को एकतरफा और धांधली बताते हुए इसका पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ, पाकिस्तान की सत्ता पर काबिज गठबंधन के दो बड़े दल—नवाज शरीफ की PML-N और बिलावल भुट्टो की PPP—इस सुलगते माहौल में भी एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में आमने-सामने खूनी शह-मात का खेल खेल रहे हैं। जनता के विरोध और राजनीतिक शून्यता के बीच यह सोमवार सीमा पार एक बड़े सियासी संकट का गवाह बनने जा रहा है।
भारत की पैनी नजर: 'शोषण का नतीजा है यह आक्रोश'
सीमा पार हो रही इस पूरी उथल-पुथल पर नई दिल्ली में भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और विदेश मंत्रालय बारीक नजर बनाए हुए हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि PoK में जनता का यह अभूतपूर्व गुस्सा दरअसल पिछले कई दशकों से इस्लामाबाद द्वारा किए जा रहे प्रशासनिक उत्पीड़न, मानवाधिकारों के हनन और व्यवस्थित आर्थिक शोषण का सीधा परिणाम है। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी हाल ही में कड़ा संदेश देते हुए दोहराया है कि पाकिस्तान से अब किसी भी मुद्दे पर कोई बात नहीं होगी; यदि कभी बातचीत की मेज सजेगी, तो वह सिर्फ भारत के अभिन्न हिस्से यानी पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को वापस भारत में मिलाने की शर्तों पर होगी।