ट्रंप को लगा जिंदगी का सबसे बड़ा झटका, उनके सबसे भरोसेमंद साथी का अचानक हुआ निधन
अमेरिकी राजनीतिक गलियारे से एक बेहद चौंकाने वाली और दुखद खबर सामने आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकारों में शामिल और दक्षिण कैरोलिना के कद्दावर सीनेटर लिंडसे ग्राहम अब हमारे बीच नहीं रहे। मात्र 71 वर्ष की आयु में एक 'संक्षिप्त और अचानक' हुई बीमारी के बाद शनिवार (स्थानीय समयानुसार) शाम को उनका निधन हो गया।
उनके आधिकारिक कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इस दुखद घटना की पुष्टि की है। ग्राहम के परिवार ने इस बेहद संवेदनशील और कठिन समय में अपनी निजता (प्राइवेसी) बनाए रखने की अपील की है।
निधन से एक दिन पहले यूक्रेन में थे ग्राहम
इस खबर ने हर किसी को इसलिए भी स्तब्ध कर दिया है क्योंकि अपने निधन से ठीक एक दिन पहले यानी शुक्रवार को ग्राहम यूक्रेन की राजधानी कीव में थे। वहां उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाकात की थी। यह ग्राहम की यूक्रेन की 10वीं यात्रा थी। राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने भी सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए अमेरिकी समर्थन के लिए सीनेटर ग्राहम का आभार जताया था। किसी को अंदाजा नहीं था कि यूक्रेन की जमीन पर अमेरिकी हितों की वकालत करने के तुरंत बाद उनका स्वास्थ्य इतनी तेजी से बिगड़ जाएगा।
डोनाल्ड ट्रंप के सबसे वफादार साथी
लिंडसे ग्राहम को अमेरिकी सत्ता के केंद्र में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे मजबूत स्तंभों में गिना जाता था। साल 2016 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान ग्राहम ने खुद रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से दावेदारी पेश की थी। लेकिन ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद वे उनके सबसे पक्के सलाहकार और दोस्त बन गए। चाहे गोल्फ का मैदान हो या विदेश नीति से जुड़े गंभीर फैसले, ग्राहम हमेशा ट्रंप के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े दिखाई देते थे। खासकर रूस और ईरान जैसे देशों के खिलाफ कड़े फैसले लेने में ट्रंप हमेशा ग्राहम की आक्रामक नीतियों पर भरोसा करते थे।
दक्षिण कैरोलिना की राजनीति का एक ऐतिहासिक चेहरा
ग्राहम का राजनीतिक सफर बेहद शानदार और ऐतिहासिक रहा।
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1994 में रचा इतिहास: वे दक्षिण कैरोलिना के तीसरे कांग्रेसनल जिले से 1877 के बाद पहले रिपब्लिकन नेता बने जिन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में कदम रखा।
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2002 में सीनेट का सफर: साल 2002 में वे पहली बार अमेरिकी सीनेट के लिए चुने गए। इसके बाद 2008, 2014 और 2020 में भी जनता ने उन पर भरोसा जताया।
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वोटों का रिकॉर्ड: 2008 के आम चुनाव में 10 लाख से ज्यादा वोट हासिल करके उन्होंने दक्षिण कैरोलिना के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया था।