माथे पर तिलक लगाने से रोका तो लंदन में 9 साल के लड़के के पिता ने ठोंका 31 लाख मुआवजे का दावा

माथे पर तिलक लगाने से रोका तो लंदन में 9 साल के लड़के के पिता ने ठोंका 31 लाख मुआवजे का दावा

ब्रिटेन की राजधानी लंदन से एक ऐसा हैरान करने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक स्वतंत्रता और नस्लीय भेदभाव की बहस को एक बार फिर से हवा दे दी है। लंदन के एक नामी स्कूल में पढ़ने वाले 9 साल के एक मासूम हिंदू बच्चे के साथ स्कूल प्रशासन द्वारा ऐसा बर्ताव किया गया जिसने उसके परिवार को हिला कर रख दिया। बच्चे के माथे पर पारंपरिक धार्मिक तिलक लगा होने के कारण स्कूल के अधिकारियों ने उसे कक्षाओं में जाने से रोक दिया और उसे जबरन हटाने का दबाव बनाया। इस अपमानजनक और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले रवैये से आहत होकर बच्चे के पिता ने चुप बैठने के बजाय कानूनी रास्ता चुना और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ अदालत में पूरे 31 लाख रुपये के मुआवजे का दावा ठोक दिया है।

जानिए क्या है पूरी घटना और कैसे स्कूल प्रशासन ने पार की सारी हदें

पीड़ित परिवार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, उनका 9 साल का बेटा अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए रोज की तरह अपने माथे पर तिलक लगाकर स्कूल गया था। स्कूल में प्रवेश करते ही वहां के कुछ शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों की नजर बच्चे के माथे पर पड़े तिलक पर पड़ी। इसके बजाय कि वे इसे एक सांस्कृतिक या धार्मिक आस्था का प्रतीक मानकर स्वीकार करते, उन्होंने इसे स्कूल के ड्रेस कोड और नियमों का उल्लंघन करार दिया। आरोप है कि अधिकारियों ने न केवल बच्चे को सबके सामने मानसिक रूप से प्रताड़ित किया बल्कि उसे तब तक कक्षा में जाने से रोके रखा जब तक कि उसने पानी से धोकर अपना तिलक साफ नहीं कर दिया। एक छोटे से बच्चे के साथ इस तरह के बर्ताव ने उसके कोमल मन पर गहरा आघात पहुंचाया और परिवार को झकझोर कर रख दिया।

धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों के हनन पर भड़का परिवार

जब इस घटना की जानकारी बच्चे के माता-पिता को मिली, तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। पिता का कहना है कि ब्रिटेन जैसे देश में जहां बहुसंस्कृतिवाद और धार्मिक स्वतंत्रता के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहां एक छोटे बच्चे को उसकी धार्मिक पहचान के कारण निशाना बनाया जाना किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जा सकता है। परिवार ने स्कूल प्रबंधन से लिखित माफी मांगने और इस तरह की संकीर्ण नीतियों को बदलने की मांग की, लेकिन स्कूल प्रशासन अपनी गलती मानने के बजाय अपने सख्त नियमों का हवाला देकर पल्ला झाड़ने लगा। इसके बाद परिवार ने बिना डरे इस अन्याय के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का कड़ा फैसला किया और मानवाधिकार व धार्मिक भेदभाव के तहत मुआवजे का केस दर्ज करा दिया।

31 लाख रुपये के मुआवजे का दावा और कानूनी गलियारों में मचा हड़कंप

लंदन की अदालत में दायर किए गए मुकदमे में पीड़ित परिवार ने स्कूल प्रशासन से मानसिक उत्पीड़न, धार्मिक स्वतंत्रता के हनन और बच्चे के अधिकारों के उल्लंघन के लिए लगभग 31 लाख रुपये (भारतीय मुद्रा के अनुसार) के भारी-भरकम मुआवजे की मांग की है। इस कानूनी कदम के उठाते ही लंदन के शैक्षिक गलियारों और स्थानीय मीडिया में हड़कंप मच गया है। मानवाधिकार संगठनों और हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी इस परिवार का खुलकर समर्थन करना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि इस तरह के मामलों में यदि कड़े कानूनी कदम नहीं उठाए गए, तो स्कूलों में पढ़ने वाले अन्य अल्पसंख्यक बच्चों के मन में भी अपनी संस्कृति और परंपराओं को लेकर डर बैठ जाएगा।

ब्रिटेन के स्कूलों में सांस्कृतिक और धार्मिक सहिष्णुता पर उठ रहे गंभीर सवाल

यह पूरी घटना केवल एक स्कूल या एक बच्चे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि आधुनिक और विकसित कहे जाने वाले पश्चिमी देशों में भी आज धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को लेकर कितनी असहजता मौजूद है। जानकारों का मानना है कि स्कूल बच्चों को ज्ञान और नैतिकता का पाठ पढ़ाने के स्थान पर यदि इस तरह की संकीर्ण मानसिकता का परिचय देंगे, तो समाज में दूरियां और बढ़ेंगी। लंदन की अदालत में चल रहा यह हाई-प्रोफाइल मामला अब एक बड़ी मिसाल बनने जा रहा है, जो यह तय करेगा कि क्या शैक्षणिक संस्थान छात्रों की धार्मिक आस्थाओं को दबाने का अधिकार रखते हैं या उन्हें अपने संस्कारों के साथ जीने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए।