ट्रंप का 'चोर रास्ता': कोर्ट ने रोका तो बंधुआ मजदूरी का बहाना बना भारत सहित 60 देशों पर लगाया 10% टैरिफ

ट्रंप का 'चोर रास्ता': कोर्ट ने रोका तो बंधुआ मजदूरी का बहाना बना भारत सहित 60 देशों पर लगाया 10% टैरिफ

अमेरिकी अदालत से बड़ा कानूनी झटका लगने के बाद ट्रंप प्रशासन ने एक ऐसा अप्रत्याशित कदम उठाया है, जिसने वैश्विक व्यापार जगत में खलबली मचा दी है। अदालती आदेश को दरकिनार करने के लिए एक अनोखा 'चोर रास्ता' निकालते हुए प्रशासन ने विदेशी सामानों पर भारी प्रतिबंध मढ़ दिए हैं। इस नए पैंतरे के तहत, वाशिंगटन ने भारत समेत दुनिया के 60 से अधिक देशों से आने वाले आयात पर सीधे 10 फीसदी का दंडात्मक टैरिफ (आयात शुल्क) थोप दिया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस भारी-भरकम टैक्स को लागू करने के लिए ट्रंप प्रशासन ने मानवाधिकारों और 'बंधुआ मजदूरी' (Forced Labor) को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया है।

अदालती नाकामी को छिपाने के लिए नया पैंतरा

दरअसल, पिछले कुछ समय से अमेरिकी सरकार लगातार उन कानूनी दांव-पेंचों में उलझी हुई थी, जिसके जरिए वे घरेलू बाजार को सुरक्षित करने के लिए मनमाने टैक्स लगाना चाहते थे। हालांकि, अमेरिकी न्यायपालिका ने उनके इस कदम को अवैध बताते हुए इस पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। कोर्ट से मिले इस बड़े झटके के बाद यह माना जा रहा था कि ट्रंप प्रशासन को अपने कदम पीछे खींचने पड़ेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। प्रशासन के रणनीतिकारों ने अमेरिकी व्यापारिक कानूनों की बारीकियों को खंगाला और एक ऐसे पुराने कानूनी प्रावधान को ढूंढ निकाला जिसके तहत बिना कोर्ट की मंजूरी के भी आयात पर पाबंदी लगाई जा सकती है।

भारत समेत 60 देशों के खिलाफ मानवाधिकार का दांव

इस नए आदेश के दायरे में केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया की कई प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्थाएं आ गई हैं। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इन 60 देशों में बनने वाले कई उत्पादों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बंधुआ मजदूरी या शोषणकारी श्रम का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी तर्क को ढाल बनाकर प्रशासन ने 10% का टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। जानकारों का मानना है कि यह कदम पूरी तरह से राजनीतिक और रणनीतिक है, जिसका असली मकसद मानवाधिकारों की रक्षा करना कम और अदालती आदेश को बाईपास करके वैश्विक व्यापार में अमेरिका को ऊपरी हाथ दिलाना ज्यादा है।

वैश्विक बाजार और भारतीय निर्यातकों पर गहरा असर

ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से वैश्विक सप्लाई चेन को एक और बड़ा झटका लगा है। भारत के कपड़ा, हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद और मैन्युफैक्चरिंग जैसे प्रमुख क्षेत्र, जो अमेरिकी बाजार पर काफी हद तक निर्भर हैं, इस 10% अतिरिक्त ड्यूटी की वजह से सीधे प्रभावित होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अमेरिका की नई संरक्षणवादी नीति का हिस्सा है, जिसे 'जेनरेटिव एआई सर्च' और आधुनिक व्यापारिक पैंतरेबाजी के दौर में एक बेहद आक्रामक कदम माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि भारत और अन्य प्रभावित देश इस एकतरफा अमेरिकी कार्रवाई के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (WTO) का रुख करते हैं या कोई जवाबी टैक्स नीति अपनाते हैं।

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