क्या सोने की तरह आसमान छुएगा कच्चा तेल? होर्मुज के बाद लाल सागर में सऊदी टैंकरों पर हमला, 100 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में जारी भारी गतिरोध के बीच अब लाल सागर (Red Sea) भी युद्ध के मैदान में तब्दील हो चुका है, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में सऊदी अरब के दो बड़े तेल टैंकरों पर किए गए मिसाइल हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त आग लग गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) रातों-रात 6 से 7 फीसदी की छलांग लगाते हुए दो महीने में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। इस अप्रत्याशित संकट ने दुनियाभर की सरकारों को चिंता में डाल दिया है कि क्या अब कच्चा तेल भी सोने की तरह एक नया रिकॉर्ड बनाने की राह पर है।
होर्मुज के बाद लाल सागर ब्लॉक: चौतरफा घिरी ग्लोबल सप्लाई चेन
वैश्विक तेल व्यापार के लिए सबसे संवेदनशील माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से ही अमेरिकी नाकाबंदी और ईरान के साथ सैन्य टकराव के कारण ट्रैफिक ठप पड़ा था। ऐसे में सऊदी अरब होर्मुज को बायपास करके लाल सागर के रास्ते दुनिया को तेल की सप्लाई कर रहा था। लेकिन हूतियों द्वारा बाब-अल-मंदेब (Bab-al-Mandeb) और लाल सागर में सऊदी पोर्ट्स की पूर्ण नाकेबंदी के ऐलान और सीधे टैंकरों को निशाना बनाने से यह वैकल्पिक लाइफलाइन भी कटती दिख रही है। एशियाई देशों के खरीदारों को अब मजबूरन अफ्रीका का चक्कर लगाकर लंबा और बेहद महंगा समुद्री रास्ता चुनना पड़ रहा है, जिससे शिपिंग फ्रेट और इंश्योरेंस का खर्च आसमान छूने लगा है।
ट्रंप की 'सख्त चेतावनी' और महायुद्ध की आहट
लाल सागर में हुए इस बड़े हमले के बाद भू-राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद आक्रामक बयान जारी करते हुए साफ कहा है कि अगर हूतियों की तरफ से लाल सागर के शिपिंग रूट पर कोई भी अगला हमला हुआ, तो अमेरिका इसके लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराएगा। ट्रंप ने ईरान और हूतियों के खिलाफ "बड़ी सैन्य सजा" (Major Military Punishment) और ईरान पर एक "बड़े हमले" (Massive Attack) की चेतावनी दी है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच शांति वार्ता की गुंजाइश पूरी तरह खत्म होने से मार्केट एक्सपर्ट्स को डर है कि यह टकराव लंबे समय तक खिंच सकता है।
क्या 120 या 150 डॉलर तक जा सकता है क्रूड?
बाजार के जानकारों और दिग्गज वैश्विक इन्वेस्टमेंट बैंकों का मानना है कि कच्चे तेल में आई यह तेजी सिर्फ एक शुरुआत हो सकती है।
गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) की हालिया चेतावनी: अगर होर्मुज और लाल सागर के प्रमुख जलमार्गों से तेल की सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो इस साल के अंत तक ब्रेंट क्रूड आसानी से 120 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल जाएगा।
याद दिला दें कि इसी साल अप्रैल में जब मिडिल ईस्ट का संकट चरम पर था, तब तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं। अगर अमेरिका और ईरान के बीच सीधे युद्ध की स्थिति बनती है, तो कच्चे तेल का दाम सोने की तरह अनियंत्रित होकर $140 से $150 के ऐतिहासिक स्तर को भी चुनौती दे सकता है।
भारत की अर्थव्यवस्था और आपकी जेब पर सीधा असर
भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए खाड़ी देशों और लाल सागर का यह संकट सीधे तौर पर भारतीय घरेलू बाजार को प्रभावित करेगा। भारत के घरेलू वायदा बाजार (MCX) में भी कच्चे तेल के दामों में 6% से ज्यादा का उछाल देखा गया है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड $100 के ऊपर टिका रहता है, तो भारतीय तेल कंपनियों पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने का भारी दबाव बनेगा। ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिसके परिणामस्वरूप आने वाले दिनों में आम जनता को देश में चौतरफा महंगाई की एक नई लहर का सामना करना पड़ सकता है।