शी जिनपिंग का भारत दौरा कन्फर्म! 12 सितंबर को दिल्ली पहुंचेंगे चीनी राष्ट्रपति, BRICS में होगा महामंथन
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा को लेकर बीते कई दिनों से लगाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय कयासों पर गुरुवार को आधिकारिक विराम लग गया। बीजिंग स्थित चीनी विदेश मंत्रालय ने औपचारिक ऐलान करते हुए पुष्टि की है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग नई दिल्ली में 12 सितंबर से शुरू होने जा रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल होंगे।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के औपचारिक निमंत्रण पर चीनी राष्ट्राध्यक्ष 12 और 13 सितंबर को भारत की मेजबानी में आयोजित इस महासम्मेलन में भाग लेंगे। करीब सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी चीनी राष्ट्रपति का यह पहला भारतीय दौरा होगा।
गलवान घाटी टकराव के बाद पहली बार भारतीय जमीन पर शी जिनपिंग
शी जिनपिंग का यह दौरा द्विपक्षीय और भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। इससे पहले वे अक्टूबर 2019 में तमिलनाडु के मामल्लापुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दूसरे अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने भारत आए थे।
हालांकि, इसके कुछ महीनों बाद ही वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुए हिंसक सैन्य टकराव के बाद से नई दिल्ली और बीजिंग के कूटनीतिक रिश्तों में अभूतपूर्व तनाव आ गया था। इससे पहले शी जिनपिंग वर्ष 2016 में गोवा में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन और सितंबर 2014 में अपने पहले आधिकारिक द्विपक्षीय दौरे पर भारत पहुंचे थे, जहां दोनों शीर्ष नेताओं के बीच व्यापक रणनीतिक वार्ता हुई थी।
वैश्विक संकटों के बीच नई दिल्ली में ब्रिक्स महामंथन
शनिवार से शुरू होने जा रहे दो दिवसीय 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा स्थिरता, स्वास्थ्य तंत्र, आपदा प्रबंधन और संवेदनशील आपूर्ति श्रृंखलाओं के सामूहिक लचीलेपन पर मुख्य ध्यान दिया जाएगा। यह उच्चस्तरीय बैठक ऐसे नाजुक मोड़ पर हो रही है जब अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है।
इसमें रूस-यूक्रेन के बीच जारी लंबा सैन्य संघर्ष, पश्चिम एशिया में तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी का खतरा और अमेरिकी प्रशासन की आक्रामक टैरिफ व व्यापार नीतियां शामिल हैं। ऐसे ध्रुवीकृत दौर में ब्रिक्स ब्लॉक वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की आवाज को मुखर करने का प्रयास कर रहा है।
पुतिन, पेज़ेशकियान और रामफोसा समेत दुनिया के शीर्ष नेता होंगे शामिल
राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में शी जिनपिंग के अलावा कई वैश्विक हस्तियां एक मंच पर जुटेंगी। इनमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो की उपस्थिति तय है।
हालांकि सम्मेलन से ठीक पहले सदस्य देशों के बीच साझा घोषणापत्र पर पूर्ण सहमति को लेकर संशय बना हुआ है। पश्चिम एशिया के जटिल हालात को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के मध्य कूटनीतिक मतभेद आम सहमति के प्रयासों को प्रभावित कर सकते हैं, क्योंकि ब्रिक्स का पूरा तंत्र सर्वसम्मति के सिद्धांत पर आधारित है।
11 देशों का मजबूत ब्लॉक: वैश्विक अर्थव्यवस्था में 40% भागीदारी
शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ खड़े ब्रिक्स संगठन का वर्ष 2024 में बड़ा विस्तार हुआ था, जिसके तहत मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और सऊदी अरब पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद 2025 में इंडोनेशिया को भी इस ब्लॉक में औपचारिक सदस्यता दी गई। संगठन ने पिछले वर्ष बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम को साझेदार देश बनाया था। वर्तमान में 11 पूर्ण सदस्यों वाला यह समूह पूरी दुनिया की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी, 40 प्रतिशत वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और 26 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है। भारत की अध्यक्षता में इस बार का ब्रिक्स एजेंडा लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के चार प्रमुख स्तंभों के इर्द-गिर्द केंद्रित है।