Up Kiran, Digital Desk: मध्य प्रदेश में खतरनाक खांसी सिरप पीने से 24 बच्चों की जान जाने के बाद सामने आई यह घटना पूरे तंत्र पर गंभीर सवाल उठाती है। छिंदवाड़ा जिले के जटाछपर गांव का 5 साल का कुनाल यादववंशी 115 दिनों तक जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करने के बाद अंततः अपने घर वापस लौटा है। उसकी वापसी ने उसके घर में फिर से आवाज और उम्मीद पैदा की है, मगर इस कठिन संघर्ष की कीमत बहुत भारी रही कुनाल अब देख नहीं सकता।
कुनाल उन बच्चों में से था, जिन्होंने खांसी की दवा ‘कोल्ड्रिफ’ का सेवन करने के बाद गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे। इस जहरीली दवा ने प्रदेश में 24 परिवारों से उनके प्यारे बच्चे छीन लिए। 24 अगस्त को हल्का बुखार आने पर कुनाल के परिजन उसे स्थानीय डॉक्टर प्रवीण सोनी के पास ले गए थे। डॉक्टर ने कुछ दवाओं के साथ यही खांसी का सिरप लिख दिया। मगर सिरप लेने के कुछ ही समय बाद कुनाल की हालत तेज़ी से बिगड़ने लगी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जांच में यह खुलासा हुआ कि सिरप के जहरीले प्रभाव ने उसकी दोनों किडनियों को गहरी चोट पहुँचाई, जिससे उसे एक्यूट किडनी फेल्योर हो गया। गंभीर हालत में 30 अगस्त को उसे नागपुर भेजा गया। अगले दिन पिता टिक्कू यादववंशी उसे लेकर नागपुर पहुंचे, जहां उसे कई अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिसमें AIIMS नागपुर भी शामिल था।
करीब डेढ़ महीने तक मासूम को रोज़ डायलिसिस से गुजरना पड़ा। डॉक्टरों ने परिवार को स्पष्ट रूप से बता दिया था कि उसकी जीवित रहने की संभावना बहुत कम है। हर दिन परिवार को यही चिंता रहती थी कि कहीं यह उसका आखिरी दिन न हो।
मगर कुनाल ने हार मानने का नाम नहीं लिया। 115 दिनों की लंबी और कष्टदायक लड़ाई के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी मिल गई और वह अपने घर वापस आ सका। हालांकि, जहरीली दवा का असर उसकी आंखों पर भी पड़ा। डॉक्टरों के अनुसार, आंखों के तरल का सूख जाना उसकी रोशनी के चले जाने का कारण बना, जबकि जहर के न्यूरोलॉजिकल प्रभाव के कारण उसे चलने-फिरने में भी परेशानी हो रही है।
कुनाल के पिता का कहना है, "हमने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी। हर दिन वह हमसे दूर होता जा रहा था। आज उसका हमारे साथ होना सबसे बड़ा चमत्कार है।" डॉक्टरों के अनुसार, कुनाल को लंबे समय तक इलाज, पुनर्वास और निगरानी की आवश्यकता होगी। उसकी कहानी केवल एक बच्चे की नहीं, बल्कि लापरवाह दवा व्यवस्था और मासूम जिंदगियों की क़ीमत की दुखद गवाही है।
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