झारखंड में गिरोहों के बीच बढ़ता हुआ संघर्ष न केवल राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बन चुका है, बल्कि यह आम नागरिकों के लिए भी एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। हाल ही में झारखंड और देहरादून में एक ऐसे आपराधिक साजिश का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें एक गिरोह ने अपने प्रतिद्वंद्वी को खत्म करने की योजना बनाई। इस साजिश के दौरान विक्रम शर्मा नामक शख्स की हत्या कर दी गई, जो कि एक गिरोह का सरगना था।
हत्या की साजिश का उद्देश्य: गिरोहों के बीच वर्चस्व की लड़ाई
झारखंड के गणेश सिंह गिरोह और अखिलेश सिंह गिरोह के बीच एक गंभीर विवाद सामने आया था, जो कुछ हफ्तों से चल रहा था। सूत्रों के अनुसार, गणेश गिरोह का उद्देश्य अखिलेश गिरोह को कमजोर करना था और इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए वे लगातार नए तरीकों की तलाश कर रहे थे। पहले कन्हैया सिंह को निशाना बनाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन जब वह प्रयास असफल रहा, तो देहरादून में रह रहे विक्रम शर्मा को मारने का फैसला लिया गया।
विक्रम शर्मा की हत्या और गिरोहों की जड़ें
विक्रम शर्मा, जो झारखंड के एक प्रमुख गिरोह का सरगना था, एक जनवरी को राधा स्वामी सत्संग में भाग लेने के लिए झारखंड से देहरादून पहुंचे थे। यह वह समय था जब गणेश गिरोह के शूटरों ने विक्रम के ठिकानों की रेकी शुरू की और उनकी हत्या की साजिश रची।
गणेश गिरोह की रणनीति: आसान लक्ष्य
सूत्रों के मुताबिक, झारखंड में अखिलेश गिरोह का प्रभाव इतना ज्यादा था कि यहां गिरोह के किसी सदस्य को निशाना बनाना बहुत मुश्किल था। इस कारण गणेश गिरोह के लिए विक्रम शर्मा को निशाना बनाना काफी आसान था, जो देहरादून में रह रहे थे। यह स्थिति उनके लिए अधिक अनुकूल थी।
साजिश का खात्मा: शूटरों का फरार होना
विक्रम शर्मा की हत्या के बाद, तीन शूटर—आकाश प्रसाद, आशुतोष और विशाल—हिमाचल प्रदेश होते हुए हरियाणा भाग गए। हत्या के बाद यह भी सामने आया कि अमर सिंह गैंग का भी इस मामले में कुछ न कुछ हाथ हो सकता है, क्योंकि इन शूटरों पर अमर सिंह की हत्या का आरोप भी था।




