UP Kiran,Digital Desk: उत्तरकाशी जिले की आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने एक बड़ी रैली निकालकर अपनी 9 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया। इन कार्यकर्ताओं ने प्रमुख रूप से सरकार से आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने और न्यूनतम 30,000 रुपये मासिक वेतन की मांग की। उन्होंने इस संदर्भ में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को जिलाधिकारी के माध्यम से एक ज्ञापन भी भेजा है।
प्रदर्शन की व्यापकता और मांगें
गुरुवार को काली कमली धर्मशाला में एकत्रित होने के बाद, इन कार्यकर्ताओं ने मुख्य बाजार से होते हुए कलेक्ट्रेट तक रैली निकाली और नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचकर उन्होंने सरकार के खिलाफ सांकेतिक धरना दिया और अपनी समस्याओं के समाधान की मांग की।
आशा कार्यकर्ताओं का कहना था कि वे वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में अहम भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मेहनत और समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वे एक बड़े आंदोलन की ओर बढ़ सकती हैं।
सांकेतिक धरने में शामिल प्रमुख नेता
प्रदर्शन के दौरान महावीर प्रसाद भट्ट (यूनियन के जिला संयोजक, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन एटक), रेखा नौटियाल (जिला अध्यक्ष), सरिता जोशी (संरक्षक), बासु पंवार (चिन्यालीसौड़), आरती सेमवाल (भटवाड़ी), रीना सेमवाल, और कविता उनियाल सहित कई अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।
मुख्य मांगें
इन कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन में श्रम कानूनों में किए गए हालिया संशोधनों को वापस लेने और पुराने श्रम कानूनों को लागू करने की मांग की। साथ ही स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं और भोजन माताओं को सरकारी कर्मचारी घोषित कर, उन्हें प्रति माह कम से कम 30,000 रुपये वेतन देने का भी प्रस्ताव किया।




