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Up Kiran, Digital Desk: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ केवल धार्मिक कृत्य नहीं, बल्कि यह एक दिव्य अनुभव है जो भक्तों को भगवान से जोड़ता है। हालांकि, यह केवल बाहरी रूप से दिखावे के बजाय दिल से किया जाना चाहिए। पूजा में सफलता का आधार दो महत्वपूर्ण तत्वों पर टिका होता है—सच्ची श्रद्धा और सामग्री की शुद्धता। हम अक्सर श्रद्धा से पूजा करते हैं, लेकिन अनजाने में कुछ ऐसी चीजें उपयोग में लाते हैं जो पूजा की शक्ति को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं।

पारंपरिक शास्त्रों के अनुसार, भगवान को अर्पित की जाने वाली प्रत्येक वस्तु सात्विक, ताजगी से भरी और दोषमुक्त होनी चाहिए। यदि हम पूजा के दौरान बासी या अशुद्ध वस्तुएं इस्तेमाल करते हैं, तो न केवल पूजा का प्रभाव कम हो सकता है, बल्कि इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश भी हो सकता है। तो, आइए जानते हैं कि कौन सी चीजें पूजा के दौरान से बाहर रखनी चाहिए ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा और देवी-देवताओं का आशीर्वाद सदा बना रहे।

1. मुरझाए और बासी फूल से बचें

पूजा के लिए फूलों का चयन बहुत ध्यान से करना चाहिए। देवी-देवताओं को हमेशा ताजे, खिले हुए फूल अर्पित किए जाने चाहिए। मुरझाए हुए फूल न केवल पूजा की शक्ति को कमजोर करते हैं, बल्कि इन्हें नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी माना जाता है। तुलसी के पत्ते और बेलपत्र जैसे कुछ पौधों के पत्ते ताजे रहने के बावजूद उन्हें कुछ समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, लेकिन अन्य फूलों को तुरंत इस्तेमाल करना चाहिए।

2. बासी जल का प्रयोग न करें

जल का शुद्धता से सीधा संबंध है। पूजा के दौरान हमेशा ताजे जल का उपयोग करें। रातभर रखे गए पानी का इस्तेमाल पूजा में न करने की सलाह दी जाती है। यह जल दूषित माना जाता है। खासकर भगवान को स्नान कराते वक्त और भोग अर्पित करते समय ताजे जल का ही इस्तेमाल करें। हालांकि, गंगाजल को कभी बासी नहीं माना जाता और यह हर समय उपयोगी होता है।

3. पुराने नैवेद्य का पुनः प्रयोग न करें

जो भोग एक बार भगवान को अर्पित किया जा चुका है, उसे फिर से पूजा में शामिल करना सही नहीं माना जाता। अर्पित नैवेद्य को तुरंत प्रसाद के रूप में वितरित कर देना चाहिए। पुराने या झूठे नैवेद्य का पुनः उपयोग करना न केवल अनुशासनहीनता का प्रतीक है, बल्कि यह भगवान के प्रति अपमानजनक भी माना जाता है।

4. अगरबत्ती और धूप की राख से सावधान रहें

बहुत से लोग पूजा के बाद अगरबत्ती या धूप के बचे हुए अवशेषों को वहीं छोड़ देते हैं। ऐसा करना शास्त्रों के अनुसार गलत माना जाता है। पूजा स्थल पर जली हुई अगरबत्ती की राख का जमा होना दरिद्रता को आमंत्रित करता है। पूजा से पहले स्टैंड की सफाई जरूरी है ताकि कोई भी नकारात्मक प्रभाव पूजा में हस्तक्षेप न कर सके।

5. पुराने दीपक और अधजली बत्तियों का उपयोग न करें

जो दीपक एक बार जल चुका हो, उसे पुनः जलाने की बजाय नया दीपक उपयोग में लाना चाहिए। इसी तरह, जो बत्ती अधजली हो, उसे हटा कर नई बत्ती लगानी चाहिए। ऐसा करना न केवल पूजा की शक्ति को बनाए रखता है, बल्कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।