Up Kiran, Digital Desk: अमेरिका में हाल ही में स्वास्थ्य विभाग ने एक गंभीर स्वास्थ्य अलर्ट जारी किया है, जिसका सीधा असर अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाला है। यह अलर्ट Candida auris नामक फंगस के कारण आया है, जो तेजी से कई राज्यों में फैल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक ‘सुपरबग’ बन चुका है, क्योंकि यह आम एंटीफंगल दवाओं से नहीं मरा करता। इसके कारण कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीजों की जान को खतरा हो सकता है।
क्या है Candida auris?
Candida auris एक प्रकार का खमीर (फंगस) है जो शरीर के भीतर गंभीर संक्रमण पैदा करता है। यह आमतौर पर रक्त, घावों और कानों में पाया जाता है। इस फंगस की पहचान पहली बार 2009 में जापान में हुई थी, जब एक मरीज के कान में इस संक्रमण का पता चला। भारत में इसे 2014 में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक प्रमुख खतरे के रूप में पहचाना गया।
अमेरिका में इसके फैलाव की स्थिति
सीडीसी (CDC) के ताजे आंकड़ों के मुताबिक, अब तक अमेरिका के 28 राज्यों में 7,000 से अधिक लोग इस फंगस के संक्रमण का शिकार हो चुके हैं। ओरेगॉन, कैलिफोर्निया, टेक्सास, इलिनोइस, पेंसिल्वेनिया, फ्लोरिडा और जॉर्जिया जैसे राज्यों में यह तेजी से फैल चुका है।
Candida auris इतना खतरनाक क्यों है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस संक्रमण को लेकर चिंतित हैं और इसके खतरनाक होने की तीन प्रमुख वजहें बताते हैं:
मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट: यह फंगस सामान्य एंटीफंगल दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधी है, जिससे उपचार करना कठिन हो जाता है।
लैब परीक्षण में पहचान में कठिनाई: साधारण लैब टेस्ट में अक्सर इस फंगस की पहचान नहीं हो पाती, जिससे इलाज में देर होती है।
लंबे समय तक जीवित रहना: यह फंगस अस्पतालों की सतहों, उपकरणों और बेड पर कई महीनों तक जीवित रह सकता है।
अस्पतालों और नर्सिंग होम्स पर विशेष ध्यान
यह फंगस खासकर अस्पतालों और नर्सिंग होम्स में रहने वाले मरीजों के लिए ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। इन स्थानों पर साफ-सफाई और कीटाणुनाशकों से इसका पूरी तरह से सफाया नहीं हो पा रहा है, जिससे संक्रमित होने का जोखिम बढ़ता जा रहा है।
Candida auris के लक्षण: पहचानें सही समय पर
Candida auris के संक्रमण के लक्षण शरीर के प्रभावित हिस्से के आधार पर भिन्न हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर निम्नलिखित लक्षण देखे जाते हैं:
तेज बुखार और कंपकंपी: बुखार का लगातार बना रहना, दवाओं के बावजूद बुखार का उतरना।
अत्यधिक थकान: शरीर में कमजोरी और ऊर्जा की कमी महसूस होना।
ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन: रक्तचाप का गिरना और दिल की धड़कन का तेज होना।
कान में समस्या: कान में भारीपन, दर्द या दबाव की शिकायत।
कम तापमान: शरीर का सामान्य तापमान से अधिक गिर जाना।
कैसे बचें और सुरक्षित रहें?
इस खतरनाक फंगस से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका सावधानी बरतना है। कुछ अहम सुझाव:
अस्पतालों में साफ-सफाई का ध्यान रखें: अगर आप किसी अस्पताल में भर्ती हैं तो हमेशा हाथ धोने की आदत डालें, खासकर मरीज के पास जाने से पहले और बाद में।
लक्षणों पर ध्यान दें: यदि अस्पताल में इलाज के दौरान बुखार, ठंड लगने या अन्य लक्षणों का अनुभव हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों का विशेष ध्यान रखें: बुजुर्ग, शुगर या कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोग विशेष रूप से इस फंगस के संक्रमण से अधिक प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए उनका अतिरिक्त ख्याल रखें।
_1403467442_100x75.jpg)
_1935089650_100x75.png)
_860838867_100x75.png)
_1598920471_100x75.png)
_1884125996_100x75.png)