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Up Kiran,Digital Desk: शब-ए-बारात, जिसे लोग शाबान की 15वीं रात या मगफिरत की रात भी कहते हैं, इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से एक विशेष और पवित्र रात होती है। यह हर साल रमज़ान से पहले शाबान महीने की 15वीं रात को मनाई जाती है। इस रात को विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय द्वारा गुनाहों की माफी मांगने और अल्लाह से आने वाले साल के लिए दुआ करने के लिए जाना जाता है। शब-ए-बारात के दौरान लोग अपने गुनाहों की माफी चाहते हैं और इस रात का महत्व उनके लिए आध्यात्मिक रूप से बहुत अधिक होता है।

2026 में शब-ए-बारात की तारीख

भारत में 2026 में शब-ए-बारात की तारीख 3 फरवरी से 4 फरवरी तक होगी। यह तारीख चांद दिखने पर आधारित है, और शाबान के महीने के चांद को 21 जनवरी को देखा गया था। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, नया दिन सूरज डूबने के बाद शुरू होता है, यानी शब-ए-बारात मंगलवार शाम से लेकर बुधवार शाम तक मनाई जाएगी।

क्या वजह है भ्रम की?

अक्सर लोग इस दिन को लेकर भ्रमित हो जाते हैं कि शब-ए-बारात कब मनाई जाएगी। इसका कारण यह है कि शाबान का चांद समय से पहले नहीं दिखा और इसे लेकर निश्चितता नहीं थी। इसके कारण लोग 'शब-ए-बारात 2026 कब है?' जैसी खोजें करने लगते हैं। दरअसल, इस्लामिक कैलेंडर चांद के आधार पर चलता है, इसलिए तारीख का निर्धारण चांद के दिखने पर ही किया जाता है।

शब-ए-बारात की रात की विशेषताएँ

शब-ए-बारात को माफ़ी की रात भी कहा जाता है, क्योंकि इस रात को मुस्लिम समुदाय के लोग अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। इस रात का विशेष धार्मिक महत्व है। माना जाता है कि इस रात में अल्लाह अपने बंदों की किस्मत का फैसला करते हैं और उनके गुनाहों को माफ़ कर देते हैं। लोग इस रात को मस्जिदों में इबादत करने, क़ुरान पढ़ने, और अपने पूर्वजों की कब्रों पर जाकर उनके लिए दुआ करने में बिता सकते हैं।

इबादत और दुआ का महत्व

इस रात को लेकर मान्यता है कि जो लोग शब-ए-बारात के दिन इबादत करते हैं और अल्लाह से रहम की दुआ मांगते हैं, उनके गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं। धार्मिक दृष्टि से, यह एक अवसर है जब लोग आने वाले साल के लिए अपनी किस्मत के फैसले को अल्लाह के हाथों में सौंपते हैं। इस रात को विशेष रूप से मस्जिदों और घरों में इबादत की जाती है, और कई स्थानों पर धार्मिक आयोजन होते हैं।